इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत दी। कहा कि विभागीय सजा के खिलाफ पुनरीक्षण दाखिल करने में हुई देरी को माफ किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के अधीनस्थ रैंक के दंड एवं अपील नियम-1991 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो परिसीमा अधिनियम की धारा-5 के तहत देरी माफ करने की शक्ति को खत्म करता हो।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कांस्टेबल विजय कुमार की विशेष अपील मंजूर करते हुए एकल पीठ का आठ मई 2026 का आदेश रद्द कर दिया। विजय कुमार को बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में 30 नवंबर 2004 को बर्खास्त किया गया था। अपील खारिज होने के बाद उसने छह जुलाई 2006 को पुलिस महानिरीक्षक, मेरठ के समक्ष पुनरीक्षण दाखिल किया, जिसमें करीब डेढ़ वर्ष की देरी हुई थी। इसे समय सीमा के आधार पर खारिज कर दिया गया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि नियम-23 में तीन महीने की अवधि निर्धारित है, लेकिन देरी माफ करने पर स्पष्ट रोक नहीं है। कोर्ट ने देरी को माफ मानते हुए पुनरीक्षण प्राधिकारी को मामले का गुण-दोष के आधार पर कारणयुक्त आदेश पारित करने का आदेश दिया।