दर्ज मुकदमे के अनुसार 1985 में डकैती की घटना हुई। सुबह लगभग 9:30 बजे बुद्धिराम गाजीपुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान घात लगाकर हमला किया गया। चोट के कारण बुद्धिराम की मौत हो गई। घटना में विक्रमा, राज नारायण, राजदेव, रामाश्रय और राधेश्याम को आरोपी बनाया गया। आरोपियों पर बुद्धिराम के घर जाकर लूटपाट करने का आरोप भी लगा।
हाईकोर्ट ने 39 साल पुराने डकैती मामले में तीन आरोपियों को ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने यह आदेश दिया।
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दर्ज मुकदमे के अनुसार 1985 में डकैती की घटना हुई। सुबह लगभग 9:30 बजे बुद्धिराम गाजीपुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान घात लगाकर हमला किया गया। चोट के कारण बुद्धिराम की मौत हो गई। घटना में विक्रमा, राज नारायण, राजदेव, रामाश्रय और राधेश्याम को आरोपी बनाया गया। आरोपियों पर बुद्धिराम के घर जाकर लूटपाट करने का आरोप भी लगा।
इस मामले में आरोपियों पर डकैती सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा और ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आदेश को चुनौती दी। सरकार की अपील लंबित रहने के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो गई। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के मामले में विभिन्न खामियां पाते हुए ट्रायल कोर्ट के आरोपी व्यक्तियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा और सरकार की अपील खारिज कर दी।