Prayagraj News : यश हास्पिटल में अधिवक्ता की मौत के बाद जुटी भीड़।
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बुलाने पर भी नहीं आए डॉक्टरभाई तरुण ने बताया कि मृतक का इलाज डॉ. आलोक मिश्रा व डॉ. मंजुल मिश्रा की देखरेख में चल रहा था। भर्ती कराने पर एंडोस्कोपी के बाद डॉक्टरों ने सब नॉर्मल होने की बात कही थी। नौ अक्तूबर को डॉ. मंजुल ने दोबारा एंडोस्कोपी करते हुए बताया कि आंत में टेपिंग कर दी गई है। इसके बावजूद खून बहना नहीं बंद हुआ। जानकारी देने पर डॉक्टरों ने उसे ही डांटते हुए चुप करा दिया। कहा कि ज्यादा डॉक्टरी मत करो। आरोप है कि लगातार खून बहता रहा, इसके बावजूद न तो सही इलाज हुआ और न ही सही जानकारी दी गई। हालत बिगड़ने पर सुबह तीन बजे से बुलवाया जाता रहा लेकिन कोई डॉक्टर नहीं आया। इससे सुबह 7.50 मिनट पर उसके भाई की मौत हो गई।
Prayagraj News : यश हास्पिटल में अधिवक्ता की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।
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आरोप गलत, अस्पताल में तोड़फोड़ व मारपीट हुई
उधर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. आलोक मिश्रा ने मृतक के परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। बताया कि मरीज सिरोसिस व पेट के अल्सर से पीड़ित था। इलाज परिजनों की सहमति व पारदर्शिता से किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौत के बाद जुटी भीड़, जिसमें अधिवक्ता भी शामिल थे, ने स्टाफ से गालीगलौज, मारपीट की। अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और साक्ष्य मिटाने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए। मृतक की भर्ती फाइल भी छीन ले गए। पुलिस के सामने 5-6 घंटे तक तांडव चलता रहा। आरोप यह भी है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की अवमानना करते हुए पुलिस ने बिना विशेषज्ञ से जांच कराए चिकित्सा लापरवाही के मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली।