पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद बृहस्पतिवार को उसे बदलने बैंकों में पहुंचे लोगों में कुछ को पांच सौ और दो हजार के नए नोट मिले लेकिन ज्यादातर को 50 और सौ के नोट दिए गए। इससे न ग्राहकों को खास राहत मिली और न ही व्यापारियों को। जिन लोगों को पांच और हजार के पुराने नोट के बदले 50 और सौ के नोट मिले, वह घरों के लिए जरूरत भर का सामान खरीद सके, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या काफी रही, जो पांच सौ और दो हजार के नए नोट लेकर बाजार पहुंचे। ग्राहकों के नए नोट लेकर आने और सौ-दो सौ सामान खरीदने पर पांच सौ या फिर आठ-नौ सौ रुपये का सामान खरीदने पर दो हजार का नोट देेने पर फुटकर की समस्या खड़ी हो गई, क्योंकि व्यापारियों के पास भी तय सीमा में ही 50 और सौ के नोट थे। इसकी वजह से लगातार दूसरे दिन भी बाजारों में खास भीड़ नहीं हुई।
कटरा स्थित सुनीता जनरल स्टोर पर बृहस्पतिवार दोपहर तकरीबन ढाई बजे पूरी तरह सन्नाटा रहा। काउंटर पर दुकान के संचालक रामबाबू गुप्ता चिंतित मुद्रा में बैठे थे। लगभग उसी वक्त अशोक नगर की प्रियंका श्रीवास्तव अपने अधिवक्ता पति अरुण श्रीवास्तव के साथ वहां पहुंचीं। प्रियंका को पूरे माह के लिए किचन का सामान खरीदारी आईं थीं सो वह सामान का पर्चा साथ ले लाईं। स्टोर में पहुंचते ही उन्होंने पर्चा निकालकर रामबाबू को दिया। सामान देने के पहले उन्होंने प्रियंका से नोट के बारे में पूछा।
उन्होंने बताया अपनी और पति की आईडी पर बैंक से पांच और हजार के नोट बदल कर चार-चार हजार रुपये निकालें। आठ हजार रुपये सौ और 50 के नोट हैं, जबकि बाकी सात हजार रुपये हजार के नोट हैं। रामबाबू सौ और 50 के नोट के बदले तो सामान देने को तैयार हो गए लेकिन हजार का नोट लेने से इंकार कर दिया। ऐसे में प्रियंका ने साढ़े पांच हजार रुपये की खरीदारी की, जबकि शेष रकम घर में अन्य खर्चों के लिए बचा ली। यह समस्या सिर्फ प्रियंका या रामबाबू की नहीं, बल्कि हर किसी की रही।
मुट्ठीगंज थोक मंडी में किराना व्यापारी रमेश केसरवानी का कहना है कि आठ नवंबर की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पांच और हजार के नोट बंद करने, उसके स्थान पर नए नोट और उन्हें बदले की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए यह कहा था कि व्यवस्था में परिवर्तन से लोगों को कुछ समस्या हो सकती है लेकिन दो दिन में बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। बताया कि उनके पास आम दिनों में छोटी दुकानों के दर्जनभर से अधिक व्यापारी आते हैं। कोई 10 हजार तो कई 25 से 50 हजार तक का माल लेता है। कुछ व्यापारी नगद रकम देते हैं तो काफी उधार माल ले जाते हैं लेकिन दो दिन में कई व्यापारी पहुंचे लेकिन वह सामान खरीदने नहीं, बल्कि उधार लिए माल की रकम अदा करने आए। कुछ व्यापारियों ने छोटे व्यापारियों से पुराने पांच और हजार के नोट स्वीकार किए लेकिन ज्यादातर ने मनाकर दिया। मुट्ठीगंज थोक मंडी में तकरीबन सभी व्यापारियों की यही स्थिति रही।