नगर आयुक्त की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि बारिश के समय गंगा के जलस्तर में वृद्धि की वजह से रेत में दफनाए गए शवों के बाहर दिखाई पड़ने और कुत्तों व अन्य शिकारी जानवरों के नोच कर क्षत विक्षत कर प्रदूषण फैलाने की आशंका बनी रहती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए वहां दफनाए गए शवों का अंतिम संस्कार कराया जाएगा। कोरोना काल में शवों के गंगा में बहने को लेकर देश भर में शोर मचा था। इसके बाद नगर निगम की ओर से छह सौ से अधिक शवों का अंतिम संस्कार कराया गया था। नगर निगम की ओर से एक शव के अंतिम संस्कार के लिए 43 सौ रुपये दिए जाने की व्यवस्था रही है।
फाफामऊ घाट पर रेत समाधि के बाद शव दिखाई न देने पाएं और नए शव न दफनाए जाएं, इसे सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे शवों से प्रदूषण न फैलने पाए इसके लिए बाहर दिखने वाले शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है। गणेश केसरवानी, महापौर।
फाफामऊ घाट पर दफनाए गए शवों को गंगा में किसी भी दशा में बहने नहीं दिया जाएगा। ऐसे शवों के अंतिम संस्कार के लिए समय रहते कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। जो भी शव दिखाई देंगे, उनका अंतिम संस्कार कराया जाएगा। - चंद्रमोहन गर्ग, नगर आयुक्त।