सरकार्यवाह का प्रमुख संदेश एवं आह्वान:
ऊंच-नीच का त्याग : समाज में समरसता लाने के लिए भेदभाव छोड़ना अनिवार्य है।
पर्यावरण और नागरिकता : भावी पीढ़ी को अच्छा नागरिक बनाना और प्रकृति की रक्षा करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।
कर्तव्य परायणता : अच्छी बातें सुनने में सरल लेकिन अपनाने में कठिन होती हैं, जिस दिन युवा इन्हें स्वीकार कर लेंगे, लक्ष्य स्वतः प्राप्त हो जाएगा।
सांस्कृतिक एकता : भारत की सांस्कृतिक अखंडता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
जिज्ञासा सत्र में छात्रों का किया मार्गदर्शन:
कार्यक्रम के दौरान जिज्ञासा सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसमें मेडिकल कॉलेज, ट्रिपल आईटी और एम एन आई टी सहित विभिन्न संस्थानों के छात्रों ने ‘विकसित भारत’ और ‘अखंड भारत’ जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे। दत्तात्रेय होसवाले ने तार्किक रूप से उनकी शंकाओं का समाधान किया। इंदौर की स्वच्छता का उदाहरण देते हुए उन्होंने प्रयागराज के युवाओं को चुनौती दी कि यदि युवा संकल्प लें, तो प्रयागराज भी स्वच्छता में शीर्ष पर पहुंच सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एमएनआईटी के निदेशक प्रो. रमाशंकर वर्मा ने की। मंच पर सह प्रांत संघ चालक प्रो. राणा कृष्ण पाल और ट्रिपल आईटी के निदेशक मुकुल सुतावडे उपस्थित रहे। सम्मेलन में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन, क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक रमेश, प्रो. राजा राम यादव, डा. आनंद शंकर सिंह, डा. एमजे त्रिपाठी और विभिन्न कॉलेजों के करीब 1500 छात्र उपस्थित रहे।