शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन भगवती का ब्रह्मचारिणी स्वरूप में मनोहारी शृंगार किया गया। शक्तिपीठों में देवी के दर्शन और पूजन का क्रम मंगला आरती के बाद दोपहर तक और शृंगार के बाद रात तक जारी रहा। जयकारों के बीच जुटे श्रद्धालुओं में नारियल, चुनरी चढ़ाकर देवी के दर्शन किए और फिर सर्वमंगल, शुभता का आशीष मांगा। शक्तिपीठों में दुर्गासप्तशती पाठ, सहस्रचंडी पाठ सहित देवीगीतों, भजनों की धूम रही। मंदिर परिसर में महिलाओं की टोलियों ने भी भजन-कीर्तन किया। दूसरे दिन मंदिर की ओर आने वाले रास्ते पर और सजावट की गई। पताकाएं फहराईं तो परिसर को भी साड़ियों, बिजली की झालरों से सजाया गया।
मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में पुजारी राजा ने महामंगल आरती उतारी। जयकारों के बीच दर्शन के लिए महिलाओं और पुरुषों ने अलग-अलग कतारों में दर्शन किया। श्रद्धालुओं को प्रसाद भी बांटा गया। समिति अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा और महामंत्री धीरज नागर के मुताबिक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। कल्याणी देवी स्थित सिद्धपीठ कल्याणी देवी मंदिर में शृंगार दर्शन के साथ ही कर्णछेदन, मुंडन संस्कार के लिए भी श्रद्धालु दूर-दूर से आए। समिति अध्यक्ष सुशील कुमार पाठक की देखरेख में शतचंडी महायज्ञ किया गया। श्रद्धालुओं ने महाभिषेक के साथ ही यज्ञ मंडप की परिक्रमा भी की। देवी का बहुरंगी फूलों से शृंगार किया गया था।
अलोपीबाग स्थित सिद्धपीठ अलोपशंकरी में दर्शन और देवी को निशान चढ़ाने के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं के जुटने का क्रम आरंभ हुआ जो रात तक जारी रहा। शक्तिस्वरूपा मां खेमामाई के मंदिर में कंचन मालवीय की देखरेख में बहुरंगी फूलों से महाशृंगार किया गया। भावापुर स्थित काली मंदिर, कालीबाड़ी, काली थान, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर अष्टभुजी मंदिर सहित देवी के अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन किया।