समुद्र का एक सर्कुलेटरी सिस्टम है
ग्लोबलवार्मिंग को नहीं रोका गया तो आने वाले वक्त में समुद्र की गहराइयों में हाईड्रोजन सल्फाइड का बादल बन सकता है, जो समुद्री जीव-जंतुओं एवं वनस्पतियों को तो खत्म करेगा ही, हवा से संपर्क में आने के बाद मनुष्यों के साथ पृथ्वी के अन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए भी विनाशकारी साबित होगा।
डाॅ.अजय ने बताया कि समुद्र का एक सर्कुलेटरी सिस्टम है, जिसके तहत साउथ और नॉर्थ पोल पर पानी आर्कटिक और अंटार्टिक से बहने वाली ठंडी हवाओं से ऑक्सीजन जमा करता है। ठंडा पानी भारी होने के कारण महासागर के अंधेरे तल में चला जाता है। वह ऑक्सीजन भी अपने साथ तल में ले जाता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पानी का तापमान धीमी गति से बढ़ रहा है।
इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो एक वक्त ऐसा आएगा जब पानी का तापमान बढ़ने के कारण वह समुद्र के तल तक ऑक्सीजन को अपने साथ नहीं ले जा सकेगा, तब जिन बैक्टीरिया के लिए ऑक्सीजन जानलेवा है, वे हाईड्रोजन सल्फाइड का उत्पादन तेजी से करने लगेंगे और इससे बनने वाला बादल मनुष्यों के साथ सभी जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए जानलेवा बन जाएगा।
सीवर में भी बनती है हाईड्रोजन सल्फाइड
हाईड्रोजन सल्फाइड गैस ऑक्सीजन की अनुपस्थिति से तो बनती ही है, साथ ही कार्बनिक पदार्थों के विघटित होने, जीवों के मरकर सड़ने, कच्चे पेट्रोलियम पदार्थाों, प्राकृतिक गैस, ज्वालामुखीय गैसों, तरल खाद्य और सीवेज से भी बनती है। अक्सर ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं, जब सीवेज की सफाई के लिए मैनहोल में उतरने वाले सफाई कर्मी जहरीली गैस का शिकार हो जाते हैं और उनकी मौत तक हो जाती है। यह जहरीली गैस हाईड्रोजन सल्फाइड ही होती है।