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High Court : बीमा निरस्त नहीं करने पर इंश्योरेंस कंपनी पर हर्जाना, बांड पर नहीं लिखे गए थे बताए गए लाभ

Fri, 04 Oct 2024 03:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

नैनी के ग्राम तालुका ददरी निवासी श्रीनिवास मिश्रा ने 26 अगस्त-2016 को पत्नी श्यामलता के नाम पर मेटलाइफ एंडोवमेंट सेविंग प्लान लिया। इसकी प्रतिवर्ष किस्त 50,120 रुपये थी। प्लान लेने के दौरान कहा गया था कि जितना पैसा जमा होगा, उस पर 10 फीसदी का ब्याज मिलेगा।
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कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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बीमा निरस्त नहीं करने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने विनायक टावर, महात्मा गांधी मार्ग, सिविल लाइंस स्थित पीएनबी मेटलाइफ इंश्योरेंस कंपनी को 51,999 रुपये आठ फीसदी ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष मो. इब्राहिम और सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी की बेंच ने सुनाया है।

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नैनी के ग्राम तालुका ददरी निवासी श्रीनिवास मिश्रा ने 26 अगस्त-2016 को पत्नी श्यामलता के नाम पर मेटलाइफ एंडोवमेंट सेविंग प्लान लिया। इसकी प्रतिवर्ष किस्त 50,120 रुपये थी। प्लान लेने के दौरान कहा गया था कि जितना पैसा जमा होगा, उस पर 10 फीसदी का ब्याज मिलेगा।

साथ ही प्लान को कभी भी बंद करवाकर जमा राशि वापस ली जा सकती है। इसके अलावा जमा किए गए प्रीमियम के 10 गुना के बराबर जीवन बीमा और 20 गुना दुर्घटना का लाभ मिलेगा। 12 सितंबर-2016 को पॉलिसी बांड आने पर पता चला कि इसमें ऐसी कोई बात नहीं लिखी हैं, जो प्लान लेने के दौरान बताई गई थी। हालांकि बांड में यह सुविधा दी गई थी कि फ्री लुक समाधान के अंतर्गत यदि बीमाधारक इसको स्वीकारता नहीं है तो 15 दिन में बांड देकर जमा राशि को वापस ले सकता है।
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बीमा निरस्त करने के लिए श्रीनिवास ने 16 सितंबर को कंपनी को पत्र लिखा। जवाब नहीं मिलने पर 22 फरवरी-2017 को एक पत्र कार्यालय में दिया और संबंधित दस्तावेज मांगे गए। 15 और 24 अप्रैल को पत्र के माध्यम से जवाब दिया गया कि इस पर विचार किया जाएगा। इसका भी जवाब नहीं मिलने पर कंपनी को नोटिस भेजा गया, फिर भी जवाब नहीं मिला। इस पर वादी ने 18 जनवरी-2019 को आयोग में केस फाइल किया।

मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति पर देने होंगे दस हजार

पांच साल बाद फैसला सुनाते हुए आयोग ने आदेश दिया कि निर्णय की तिथि से दो माह में पॉलिसी को निरस्त करते हुए प्रीमियम के रूप में जमा किए गए 51,999 रुपये देने होंगे। साथ केस दाखिल करने की तिथि से इस रकम पर आठ फीसदी वार्षिक ब्याज का भी भुगतान करना होगा। इसके अलावा वादी को मानसिक एवं शारीरिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10,000 और अन्य खर्च के लिए 2,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान अदा करना होगा।

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