कचहरी बवाल में मृत अधिवक्ता नबी अहमद के परिजनों को 20 लाख रुपये की सरकारी सहायता मिलने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मंगलवार रात मुआवजे का चेक मिलने के बाद नबी के पिता और भाई बुधवार सुबह कचहरी पहुंचे और अधिवक्ताओं की आम सभा में दावा किया कि कमिश्नर ने उनको जबरदस्ती 20 लाख रुपये का चेक दिया है। वह इसे स्वीकार नहीं करेेंगे। चेक वापस कर दिया जाएगा। उन्होंने अधिवक्ताओं द्वारा बेटे के लिए लड़ी जा रही लड़ाई के लिए आभार जताया।
वकीलों के बीच पहुंचे नबी के पिता मो. साहिल सिद्दकी ने कहा ‘चाहिए यह था कि वह (नबी) मुझे कंधा देता, मगर मुझे उसको अपने कंधे पर ले जाना पड़ा। कल रात (मंगलवार) दस बजे सरकारी अधिकारी मेरे घर आए, मीडिया और पुलिस भी साथ थी। मुझे बुलवाया और हाथ पकड़कर बिठा लिया। इस बीच मेरे बच्चे भी आ गए थे। उन्होंने चेक मेरे हाथ पर रख दिया। तमाम फोटो खींची गई लेकिन मुझे रुपये की जरूरत नहीं है’। नबी के भाई ने कहा कि अधिकारियों का रात दस बजे घर जाने का क्या मतलब है। हम चेक स्वीकार नहीं कर रहे बल्कि लौटा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक आम सभा के बाद नबी के पिता ने शाम को मुख्य न्यायाधीश डा.डीवाई चंद्रचूड से मुलाकात कर उनको पूरे घटनाक्रम की जानकारी और सहायता राशि वापस करने की बात कही। चीफ जस्टिस ने उनसे मामले की न्यायिक जांच कर रहे जस्टिस पीकेएस बघेल के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के हड़ताल से लौटने के बाद कचहरी के वकीलों से भी अपनी हड़ताल समाप्त कर काम शुरू करने की अपील की गई है। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र के मुताबिक जिला जज के जरिये जनपद न्यायालय के प्रशासनिक जज जस्टिस दिलीप गुप्ता का संदेश मिला है जिसमें हाईकोर्ट के बाद अब कचहरी में भी हड़ताल समाप्त करने की अपील की गई है। इस बात को बृहस्पतिवार को आम सभा में रखा जाएगा।