इस बारे में पूछने पर उसने बताया कि पहले वह अपने जानने वालों को सरकारी स्कीम का फायदा दिलाने का झांसा देकर उनके मनी वालेट अकाउंट खुलवाता था। इसके बाद इनकी यूजर आईडी व पासवर्ड जामताड़ा में बैठे अपने आकाओं को दे देता था। जामताड़ा गैंग फर्जीवाड़े के जरिए उड़ाई गई रकम इन्हीं मनी वालेट अकाउंट में ट्रांसफर करता था। बाद में यह रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिए जाते थे। सूत्रों का कहना है कि धीरज ने प्रतापगढ़ के साथ ही कई अन्य शहरों में रहने वाले लोगों के नाम पर भी इसी तरह खाते खुलवाए।
कमीशन का भी देता था लालच
पुलिस सूत्रों का कहना है कि धीरज झांसा देने के साथ ही लोगों को कमीशन का लालच देकर भी फंसाता था। उसने बताया कि वह जिस एप का मनी वालेट अकाउंट खोलवाता था, उसके लिए सिर्फ आधार व कुछ अन्य दस्तावेजों के साथ ही एक सक्रिय सिम नंबर की जरूरत होती है। ऐसे में वह लोगों को प्रति अकाउंट 1500 से 2000 का लालच देकर उनसे संबंधित दस्तावेज व सिम ले लेता था।
कंपनी ने करेली में दर्ज कराया केस
उधर जिस कंपनी के मनी वालेट अकाउंट के जरिए रकम का लेनदेन किया जाता था, उसके एक अधिकारी ने करेली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कंपनी के प्रयागराज क्षेत्र के सीनियर रिलेशनशिप मैनेजर जयशंकर शुक्ला ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग कंपनी के बिजनेस पार्टनर, रिटेलर्स व डिस्ट्रीब्यूशर्स को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में ठगों ने डिस्ट्रीब्यूशर आईडी लेकर दो लाख का लेनदेन किया। जिसकेबाद करेली पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।