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Prayagraj News: ऑर्डर देकर दो व्हील चेयर मंगाई, फिर पेमेंट के नाम पर 72 हजार उड़ाए

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cyber crime - फोटो : amar ujala
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ऑर्डर देकर दो व्हील चेयर मंगवाई, फिर पेमेंट के नाम पर 72 हजार उड़ाए
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प्रयागराज। कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले मेडिकल उपकरण व्यापारी रितेश गुप्ता को ऑर्डर के नाम पर साइबर ठगों ने 72 हजार रुपये की चपत लगा दी। ऑर्डर देकर व्हीलचेयर मंगवाई और फिर पेमेंट के नाम पर खाते से रकम उड़ा दी।
रितेश केपी कक्कड़ रोड पर रहते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल पर दो अलग-अलग नंबरों से कॉल आई। यह कॉल इंडिया मार्ट एप पर वेरिफाइड परचेजर के नाम पर आई, ऐसे में उन्हें कोई संदेह भी नहीं हुआ।
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कॉल करने वाले ने खुद को राकेश कुमार बताया। यह भी कहा कि वह सेना में तैनात है। उसने कहा कि वह दो व्हील चेयर खरीदना चाहता है। व्हील चेयर धूमनगंज स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में पहुंचवा दी जाए।
व्यापारी ने ऑर्डर के मुताबिक दो व्हील चेयर ट्रॉली पर लदवाकर भेज दीं। साथ ही उसे फोन कर बता भी दिया, लेकिन ऑर्डर देने वाले ने आर्मी पब्लिक स्कूल से एक किमी पहले ही ट्रॉली रुकवा दी। इसके बाद फोन कर व्यापारी से कहा कि पेमेंट वह ऑनलाइन करेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें उसके खाते को अपनी आईडी में एड करना होगा। इसके बाद उसने अपना खाता संख्या बताया।
इसके बाद ऑर्डर देने वाले ने आईडी चेक करने के नाम पर व्यापारी की पत्नी के खाते से 100 रुपये का पेमेंट कराया और कुछ ही देर में 200 रुपये वापस कर दिए। इसके बाद पत्नी के एक खाते से 16400 और दूसरे खाते से 55,555 रुपये उड़ा दिए।
रकम यूपीआई पेमेंट के जरिये निकाली गई। बैंक जाने पर पता चला कि पेमेंट राकेश कुमार के नाम पर हुआ है। इसके बाद उन्होंने कोतवाली में अज्ञात में केस दर्ज कराया।
ऐसे फंसाते हैं जाल में
डीसीपी गंगानगर नगर अभिषेक अग्रवाल बताते हैं कि साइबर ठग ओएलएक्स या अन्य साइटों से व्यक्ति के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। इसके बाद उन्हें कॉल कर बताते हैं कि वह उनके प्रोडक्ट को खरीदने के इच्छुक हैं। इसके बाद उन्हें ऑर्डर दे देते हैं। अक्सर इस तरह की ठगी के मामलों में साइबर ठग खुद को सैन्यकर्मी बताते हैं और भरोसे में लेने के लिए संबंधित को फर्जी आईडी कार्ड, ट्रांसफर लेटर भी भेज देते हैं। फिर पेमेंट करने के नाम पर पहले अपने अकाउंट में 100, 200 रुपये का पेमेंट करने को कहते हैं। भरोसे में लेने के लिए रकम वापस भी कर देते हैं। इसके बाद झांसा देकर बड़ी रकम मांगते हैं। संबंधित व्यक्ति को लगता है कि एडवांस पेमेंट किसी प्रक्रिया का हिस्सा है और रकम तो वापस आ ही जानी है, ऐसे में वह पेमेंट कर देता है और इस तरह से वह ठगी का शिकार हो जाता है।
जैसे ही आप यूपीआई या नेटबैंकिंग या अन्य माध्यमों से पेमेंट करते हैं, साइबर ठग को आपकी डिटेल की एक्सेस मिल जाती है। फिर वह अपने पास मौजूद सॉफ्टवेयर के जरिए आपकी अन्य जानकारियां जैसे पिन, अकाउंट नंबर, यूजर आईडी आदि प्राप्त कर लेते हैं और खाते से रुपये उड़ा देते हैं। ऐसे में बिना जांचे-परखे किसी को पेमेंट न करें। एक रुपये का भी पेमेंट आपके वालेट संबंधी जानकारियों को साइबर ठग तक पहुंचा सकता है। साइबर ठगी होने पर सबसे पहले 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत साइबरक्राइमडॉटजीओवीडॉटइन पर भी दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा साइबर थाने या साइबर सेल में भी शिकायत दी जा सकती है।
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अनिल सिन्हा, रिटायर प्रबंधक, एसबीआई
आप हुए हैं साइबर ठगी के शिकार तो हमसे साझा करें जानकारी
अगर आप साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं तो कैसे हुए, ठग ने क्या कहा, उसके बाद क्या रकम वापस मिली या नहीं। यह जानकारी हमसे इस नंबर 7617566162 पर व्हाट्सएप पर साझा कर सकते हैं। हम आपसे मिली जानकारी को प्रकाशित कर अन्य लोगों को सचेत करने की कोशिश करेंगे।
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