कोर्ट ने याची के पति को माना निलंबन काल का बकाया वेतन पाने का हकदार
आठ सितंबर 93 को उनको निलंबित कर दिया गया। कोई चार्जशीट नहीं दी गई। इसी दौरान वह 31 मार्च 94 को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद उनकी अंतरिम पेंशन तय की गई। याची के पति की 19 फरवरी 16 को मृत्यु हो गई। इसके बाद याची ने निलंबन काल का बकाया वेतन, बकाया पूरी पेंशन और पति की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन का दावा किया। कोर्ट ने याची के पति को निलंबन काल का बकाया वेतन पाने का हकदार माना और कहा एससीआर रेग्यूलेशन 351 के तहत मौत के बाद कोई आपराधिक या विभागीय कार्यवाही नहीं चल सकती। इसलिए बकाया वेतन, पेंशन आदि पाने का हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि भुगतान की गई राशि की कटौती कर बकाये का भुगतान किया जाए।
सहायक अभियंता के वेतन से वसूली पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिशासी अभियंता विद्युत पीलीपोखर आगरा को सहायक अभियंता के वेतन से 5 लाख रुपये से अधिक की वसूली के आदेश पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार व विद्युत निगम से 6 हफ्ते में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सहायक अभियंता शरद कुमार चतुर्वेदी की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि 2011 में जब याची पीलीपोखर में तैनात था तो भंडार में सामग्री की चोरी को विविध अग्रिम के रूप में 514270 रुपये दर्ज किया गया। चोरी की जांच में याची निर्दोष करार दिया गया है। इसके बावजूद उसके वेतन से कटौती करने का आदेश जारी किया गया, जिसे चुनौती दी गई।