डा. बंसल हत्याकांड में गुरुवार को फिर दो पूर्व कर्मचारियों से फिर घंटों पूछताछ हुई। हालांकि इस बार निशाना सिर्फ अमरेश रहा। कर्मचारियों से उसी के बारे में पूछताछ होती रही। हत्या के बाद से उसका सामने न आना पुलिस के शक को बढ़ाता जा रहा है। मोबाइल तो बंद है ही, अपने घर वालों से भी वह संपर्क नहीें कर रहा है। आज पुलिस ने उसकी बारीक जानकारी ली। उसने कुछ नेताओं से भी संपर्क बढ़ा लिया था। एसटीएफ ने उसके करीबियों के नाम नंबर नोट कर लिए हैं। अब उनसे भी पूछताछ की जाएगी।
एसटीएफ ने गुरुवार को जीवन ज्योति अस्पताल के दो पूर्व कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। दोनों ही पहले अमरेश के साथ थे। आज की पूछताछ में निशाने पर सिर्फ अमरेश रहा। उसके करीबी दोस्तों के फोन नंबर और एक महिला के नंबरों के बारे में तहकीकात हुई। घर वालों के नंबरों को एसटीएफ पहले से ट्रेस कर चुकी है। नवंबर से पहले अमरेश डा. बंसल के बेहद करीबियों में शुमार होता था। अस्पताल में होने वाले लड़ाई झगड़ों को वह डा. राघवेंद्र केसाथ मिलकर निपटाता था। नवंबर में डाक्टर और अमरेश के बीच विवाद हुआ जिसकेबाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया।
बंसल के दुश्मनों की जितनी फेहरिस्त है, उनकी मौत का सबसे बड़ा और सीधा फायदा अमरेश को हुआ है। अमरेश के नाम से कौशांबी करोड़ों की जमीन खरीदी गई थी। डाक्टर की मौत के बाद अब वह अमरेश की हो गई। दोनों के बीच विवाद का यही सबसे बड़ा कारण था। कहा जाता है कि डा. बंसल वह जमीन बेचना चाहते थे लेकिन अमरेश इसके लिए राजी नहीं था। चूंकि जमीन अमरेश के नाम पर थी, इस कारण डाक्टर कुछ कर नहीं पाए। हत्या के बाद जिस तरह अमरेश गायब हुआ, उससे वह संदिग्ध हो गया। उसने घरवालों से भी संपर्क नहीं किया है। पुलिस को लग रहा है कि कहीं बाहर भाग गया है। उसे पकड़ने के लिए एसटीएफ पूरी कवायद कर रही है।
यूं तो डा. बंसल की नजदीकी की वजह से अमरेश करोड़ों की जमीन का मालिक हो गया था लेकिन वह अस्पताल का कर्मचारी भी था। नवंबर में उसके कई महीनों के वेतन का तकरीबन ढाई लाख बाकी था। इसी दौरान दोनों में विवाद हो गया तो डा. बंसल ने बिना पैसे दिए ही उसे नौकरी से निकाल दिया था। सैलरी के लिए भी अमरेश ने कई लोगों से डाक्टर बंसल भला बुरा कहा था।