नैनी जेल गेट पर हुए दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि नामजद आरोपियों में शामिल बहरिया ब्लाक प्रमुख चंद्रजीत यादव तथा सपा नेता अशोक यादव को सोमवार रात पकड़ा गया। उन दोनों ने इस घटना में अपनी भूमिका भी कुबूली है। उन दोनों को पुलिस ने मंगलवार शाम अदालत में पेश किया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में नैनी जेल भेज दिया गया।
रविवार दोपहर बाद कत्ल के मामले में नैनी जेल में बंद शेरडीह झूंसी के पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव से मिलकर दो सफारी गाड़ी में लौट रहे लोगों पर गेट के पास ही बाइक और कार सवार शूटरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। हमले में चंद्रभान का पुत्र ज्ञानचंद्र तथा पड़ोसी लालता मारा गया। पांच लोग घायल हुए थे। हत्याकांड में विरोधी गुट के शैलेंद्र यादव समेत नौ लोगों के खिलाफ केस लिखाया गया। इसमें छतनाग में रहने वाले सपा नेता अशोक यादव, उसके भतीजे बीडीसी राजकुमार यादव, बहरिया ब्लाक प्रमुख चंद्रजीत यादव को भी नामजद कराया गया। पुलिस बल ने अशोक को घटना वाली रात ही हिरासत में ले लिया था मगर पुलिस इनकार करती रही। कई अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
मंगलवार शाम नैनी थाने की पुलिस ने अशोक यादव तथा ब्लाक प्रमुख चंद्रजीत को अदालत में पेश किया। उन दोनों को न्यायिक हिरासत में नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया। थाना प्रभारी नैनी रामसूरत सोनकर ने बताया कि अशोक और चंद्रजीत सोमवार रात छतनाग से नाव में बैठकर गंगा पारकर नैनी के देवरख घाट पर उतरे तभी मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर घेरकर पुलिस ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उन दोनों का इरादा फरारी के लिए कोरांव की तरफ जाने का था। रात में पूछताछ के दौरान उन दोनों ने वारदात में शामिल होने की बात स्वीकारी है। उनसे मिली जानकारी के आधार पर दूसरे आरोपियों की तलाश की जा रही है।
हालांकि इंस्पेक्टर ने साजिश के बारे में ज्यादा बताने से इनकार किया। बाकी आरोपियों की तलाश में क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की पांच टीम छापेमारी कर रही है। इलाहाबाद के साथ ही मिर्जापुर, रीवा, प्रतापगढ़ के भी कई इलाकों में दबिश दी गई है। अनुमान जताया गया है कि इस वारदात के लिए पूर्वांचल से भी शूटर बुलाए गए। छोटा राजन गिरोह के खास आदमी ने भी कई शूटरों का इंतजाम किया।
मंगलवार सुबह ज्ञानचंद्र की लाश रखकर चक्काजाम कर रहे लोगों ने आईपीएस गणेश साहा पर हमले के बाद पहुंची पुलिस टीम पर जबरदस्त पथराव किया और लाठी से भी प्रहार किए। इस हमले में एसओ मऊआईमा सुनील दुबे, एसओ सरायइनायत अमित मिश्रा, एसओ औद्योगिक क्षेत्र पंकज सिंह, एसओ नवाबगंज दीपक पांडेय के अलावा बीस से ज्यादा सिपाहियों को चोट पहुंची। कुछ सिपाहियों के शरीर से खून भी बहा।
जेल में बंद सजायाफ्ता चंद्रभान को अंतिम संस्कार में नहीं लाने से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने ज्ञानचंद्र की लाश रखकर रहिमापुर तिराहे पर चक्काजाम के बाद पुलिस के साथ संघर्ष में पथराव के अलावा जमकर फायरिंग भी की। पुलिस का दावा है कि ज्यादा फायरिंग तो चक्काजाम कर रहे लोगों ने की। झूंसी पुलिस ने मौके से तकरीब सौ कारतूसों के खोखे बरामद होने का दावा किया है। ज्यादातर खोखे 315 बोर कारतूसों के हैँ।
रहिमापुर तिराहे पर पथराव और फायरिंग कर रहे उपद्रवियों को तितर-बितर करने के बाद पुलिस ने ज्ञानचंद्र का शव कब्जे में लेकर दारागंज घाट भेज दिया था। पुलिस के जवाबी हमले में बवाल कर रहे पुरुष भाग गए थे। ऐसे में पुलिस द्वारा ज्ञानचंद्र के अंतिम संस्कार की खातिर उसकी मां शेरडीह की मौजूदा प्रधान सरस्वती देवी, भाभी रंजना और दो चचेरी बहनों शांति तथा अंजली को दारागंज घाट पर लाया गया। बाद में कुछ पुरुष भी पहुंच गए। पुलिस ने बताया कि चचेरी बहन ने ज्ञानचंद्र की चिता को मुखाग्नि दी। ज्ञानचंद्र का पिता चंद्रभान और भाई राजकुमार ग्यारह साल पहले हुए बच्चा यादव हत्याकांड में सजायाफ्ता कैदी है। पिता चंद्रभान नैनी सेंट्रल जेल तथा भाई राजकुमार बस्ती जेल में बंद है। ज्ञानचंद्र को नाबालिग होने की वजह से रिहा कर दिया गया था। एक भाई राजेश यादव भी हत्या में मुल्जिम है मगर वह दो साल पहले फरार हो गया था।