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उत्पात की तैयारी थी मगर नहीं लगी भनक

Wed, 08 Jun 2016 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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क्राइम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मंगलवार को झूंसी में हुए बवाल को पुलिस अफसर अप्रत्याशित करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि किसी ने सोचा भी नहीं था कि पीड़ित परिवार के लोग ऐसा उपद्रव कर सकते हैं। सच तो यह है कि परिजनों और ग्रामीणों के इरादे की पुलिस को भनक भी नहीं लग सकी थी। पुलिस फोर्स सोमवार रात भर शव की निगरानी में दरवाजे पर मौजूद रही लेकिन अंदर तैयार हो रही बवाल की साजिश की उसे जरा भी खबर नहीं मिली। नतीजा यह रहा कि आईपीएस गणेश साहा इस आकस्मिक उपद्रव में हमले का शिकार हुए और पथराव में तमाम दूसरे पुलिसवालों को चोट पहुंची।
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नैनी जेल गेट पर रविवार को हुए शूटआऊट में मारे गए ज्ञानचंद्र के परिवार के लोग सोमवार को अड़े थे कि अंतिम संस्कार में जेल में बंद उसके पिता चंद्रभान को शामिल होने की अनुमति दी जाए। मगर डीएम ने नियमों का हवाला देते हुए मांग खारिज कर दी तो परिजनों ने कह दिया कि शाम हो गई है इसलिए मंगलवार को अंत्येष्टि की जाएगी। परिजनों ने तब किसी तरह का गुस्सा भी नहीं जताया और ऐसा जाहिर किया कि जैसे सुबह होते ही वे अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाएंगे।

मंगलवार सुबह जब घर के बाहर तैनात सीओ और थानेदारों ने शव को अंतिम संस्कार के लिए उठाने को कहा तो परिजन फिर कहने लगे कि जेल से चंद्रभान को लाया जाए। फिर बोले कि ऐसा नहीं हो सकता तो उनके असलहों को नैनी थाने से दिला दिया जाए जो पुलिस ने नैनी जेल गेट के पास हुए हमले के बाद गाड़ी से उठाए थे। पुलिस अफसरों ने इस पर सहमति दी तो परिवार के लोग यह भी कहने लगे कि मारे गए ज्ञानचंद्र  की मां शेरडीह की ग्राम प्रधान सरस्वती देवी और भाई संतोष के नाम पर शस्त्र लाइसेंस जारी कराया जाए। अफसरों ने कहा कि इस बारे में ़डीएम से बात की जाएगी। वे शव उठाकर ले चलें तो कुछ देर में नैनी थाने से हथियार मंगाकर उन्हें सौंप दिया जाएगा।
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इसके बाद परिजन और ग्रामीण ज्ञानचंद्र की अर्थी उठाकर बढ़े। तब तक पुलिस को जरा भी भनक नहीं थी कि परिजनों ने आगे बवाल काटने का मंसूबा बना रखा है। शव गांव से निकलते ही रहिमापुर तिराहे पर पहुंचने से ही पहले पथराव शुरू कर दिया गया था। पुलिस फोर्स, पीएसी, आरएएफ की मौजूदगी थी लेकिन फोर्स इतनी भी नहीं थी कि उपद्रव करने पर आमादा भीड़ को काबू में किया जा सकता। भीड़ में तमाम लोग फायरिंग भी कर रहे थे। डीआईजी जेके शाही का कहना है कि सोमवार को दिन भर और रात में परिजनों से बातचीत में कहीं से भी नहीं झलका कि वे उत्पात की मंशा बनाए हुए हैं।
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