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हिल गए मकान, दहल गए लोग

Wed, 07 Oct 2015 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। बुधवार सुबह 10.05 बजे हुए धमाके से नैनी इलाके के पंजाबी हाता और सब्जी मंडी के आसपास के इलाके में खलबली मच गई। रामानंद तिवारी के घर में ऐसा तगड़ा विस्फोट हुआ कि आसपास के मकान हिल गए। खिड़कियों के कांच चटक गए। लोग ऐसा दहले और घबराए कि जिस हाल में था वैसे ही घर से गिरते-पड़ते बाहर भागा। करीब एक किलोमीटर दूर तक धमाके की गूंज सुनी गई। कुछ देर बाद जब तिवारी के मकान में धमाके की खबर फैली तो वहां तमाशबीनों की भीड़ जुटने लगी। सैकड़ों लोगों की भीड़ को संभालने में पुलिस को भी बड़ी मुश्किल झेलनी पड़ी।
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करछना इलाके के रमेश सिंह सुबह दस बजे जब विस्फोट हुआ तो घटनास्थल से करीब पौन किलोमीटर दूर मेवालाल की बगिया में चाय की दुकान पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि विस्फोट की गूंज से लोग स्तब्ध रह गए। कोई कुछ समझ ही नहीं सका कि आखिर हुआ क्या। लोग एक-दूसरे से पूछने लगे कि कहां धमाका हुआ। उधर, रामानंद के घर में धमाके ने उसके पड़ोस में रहने वाले रामसनेही और पवनराज मिश्रा समेत दर्जनों लोगों के मकान हिला दिए। विस्फोट हुआ और कांच चटके तो लोग भूकंप जैसी अनहोनी के डर से घर से निकलकर बाहर भागे। आधे घंटे में ही तिवारी के घर में धमाका होने की खबर फैली और फिर दूर-दूर से लोग वहां पहुंचने लगे। आलम यह हुआ कि भीड़ और सड़क पर गाड़ियों की की वजह से मिर्जापुर रोड की एक लेन पर जाम लगने पर पुलिस को सख्ती करनी पडी। देर शाम तक घटनास्थल पर लोगों का आकर मोबाइल से फोटो खींचना जारी था।

नैनी में हुए धमाके का मुख्य संदिग्ध सलीम उर्फ मनोज गुप्ता घटना के बाद अपने बेटे महताब समेत गायब है। मनोज के बारे में छानबीन पर पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। उसने दो शादी की थी। पहला ब्याह नैनीताल में मुस्लिम महिला से किया और अपना नाम भी बदला। फिर वहां से एक बेटे को लेकर दस साल पहले नैनी आकर यहां महिला होमगार्ड से शादी रचा ली। दूसरी पत्नी नैनी में ही अलग मकान में रहती है। इस सनसनीखेज घटना के बारे में देर शाम तक कौशाम्बी के सैनी इलाके में सलीम उर्फ मनोज के बुजुर्ग मां-बाप और भाइयों को जानकारी नहीं थी। उधर, पुलिस इस घटना का राजफाश करने के लिए सलीम उर्फ मनोज और उसके बेटे महताब की तलाश में देर रात तक भटकती रही।
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मंगलवार सुबह नैनी में सगे भाइयों ब्रहमानंद और रामानंद तिवारी के मकान में विस्फोट के बाद लोगों ने किराएदार 45 वर्षीय सलीम उर्फ मनोज गुप्ता को भागते देखा था। वह लुंगी-बनियान पहने घर से निकला था। शुरू में लोगों का कहना था कि महताब कौशाम्बी के सलीम उर्फ मनोज के साथ किराए पर रहता था। बाद में हकीकत खुली कि सलीम उर्फ मनोज उसका पिता है। आसपास के लोगों से पुलिस को जानकारी मिली कि  मनोज गुप्ता उर्फ सलीम उर्फ मैकू कौशाम्बी में सैनी इलाके के रामपुर धमावां गांव का रहने वाला है।

अमर उजाला संवाददाता ने देर शाम इस गांव जाकर मनोज के माता-पिता से बात की। उसके बूढ़े पिता गयाप्रसाद गुप्ता आइसक्रीम बेचकर पत्नी के साथ गुजरा करते हैं। उनके चार बेटों में एक राजकुमार का निधन हो चुका है। दो पुत्र सुरेश और अनिल गांव में रहते हैं। मनोज के बारे में बताया कि वह करीब बीस साल पहले रोजगार के लिए नैनीताल चला गया था। वहां उसने रेहाना उर्फ रानी नामक मुस्लिम लड़की से ब्याह रचाया तो अपना नाम बदलकर सलीम कर दिया। रानी से दो बेटे हुए। शमशाद और महताब। शमशाद नैनीताल में बीएससी की पढाई कर रहा है। दस साल पहले मनोज उर्फ सलीम नैनीताल में रानी को छोड़ एक बेटे महताब को लेकर नैनी चला आया।

यहां उसने नीतू पाल से दूसरा ब्याह किया जो होमगार्ड है। उसके तीन बच्चे हुए- कोमल (6), प्रिया (4) और तीन साल की अंशू। वह चक दोंदी में अलग मकान में रहती है। सलीम उर्फ मनोज गुप्ता पिछले साल बेटे महताब के साथ पंजाबी हाता में रामानंद के मकान में किराए पर आ गया। पिता गयाप्रसाद ने बताया कि मनोज अंतिम बार चार माह पहले गांव गया था। वैसे भी दूसरे समुदाय की लड़की से शादी के बाद माता-पिता और रिश्तेदारों ने उससे वास्ता रखना बंद कर दिया था।

पुलिस का कहना है कि मनोज और महताब मिलें तो यह साफ हो कि उसने कमरे में पटाखा तैयार किया था या किसी साजिश के तहत शक्तिशाली बम बनाया गया था। पुलिस ने चक दोंदी नैनी में सलीम उर्फ मनोज की दूसरी पत्नी नीतू पाल के घर दबिश दी मगर वहां नीतू ही बच्चों के साथ मिली। अब पुलिस को यह भी जांच करनी है कि मारे गए दो युवक सलीम और शरीफ कौन हैं? उन्हें नैनीताल से किसलिए बुलाया गया था? वे वास्तव में पटाखा बनाने वाले कारीगर हैं या फिर साजिश कुछ और थी? पुलिस के साथ ही एटीएस और केंद्रीय खुफिया शाखा इस बारे में विवेचना कर रही हैं।

शहर में नैनी की तरह जानलेवा जबरदस्त धमाके पहले भी कई बार हो चुके हैं। इसी साल जनवरी महीने में बैरहना में दुकान के भीतर ऐसा धमाका हुआ कि वह दुकान ढही और आसपास के घर-दुकानों की दीवार दरक गई। इससे पहले सितंबर 2013 में कीडगंज में केंद्रीय कर्मचारी के घर में आए पार्सल में विस्फोट से दो बच्चे और महिला जख्मी हो गईं। मई 2012 में करेली की झोपड़पट्टी में हुए जोरदार धमाके में पांच लोगों की मौत हो गई थी।

तब पता चला था कि वह धमाका सेना के हैंडग्रेनेड को खींचने से हुआ था। हैंडग्रेनेड किसी को लावारिस मिली था जिसे कबाड़ी को बेच दिया गया था। दस साल पहले धूमनगंज के नीवां में सैन्य क्षेत्र के पास लावारिस मिले हैंडग्रेनेड को उठाने पर हुए विस्फोट में छह लोगों की जान चली गई थी। तीन साल पहले करेली मे करामत की चौकी के पास घर में हुए धमाके ने नौ लोगों की जान ले ली थी। हर विस्फोट में कुछ न कुछ राज बचा रह गया।

नैनी के मकान में हुए विस्फोट में मुख्य संदिग्ध सलीम उर्फ मनोज को पुत्र महताब का अपराधियों से नाता रहा है। जुलाई में अरैल में एक पुरोहित को तमंचा सटाकर नगदी लूटने की घटना में पुलिस ने कुछ दिन बाद चार बदमाशों को दबोचा जिसमें महताब भी शामिल था। तब भी यह बात सामने आई थी कि सैनी इलाके का महताब यहां नैनी में किराए पर रहता है। अरैल में लूट के मामले में वह कुछ ही रोज पहले जेल से रिहा हुआ था। अब इस धमाके के बाद महताब की आपराधिक पृष्ठभूमि ने पुलिस और खुफिया शाखाओं को गहराई से जांच के लिए विवश कर दिया है। महताब और उसके पिता सलीम के फरार होने को भी पुलिस किसी साजिश से जोड़कर देख रही है। उनका जीवित बचना भी अचंभे की बात है।

नैनी के मकान में हुए धमाके ने स्थानीय पुलिस और एलआईयू (लोकल इंटेलीजेंस यूनिट) की लापरवाही खोलकर रख दी है। आतंकियों के किराए पर ठहरकर साजिश रचने और आतंकी हमले अंजाम देने का खुलासा होने के बाद कई साल पहले शासन से आदेश जारी हो चुका है कि हर थाने की पुलिस अपने इलाके के मकानों-लॉज में किराए पर ठहरे लोगों के बारे में पूरी जानकारी रखे। मगर बार-बार ऐसी घटनाओं के बावजूद पुलिस किराएदारों के नाम-पते का सत्यापन नहीं कर रही है। नैनी की घटना में तो सलीम का पुत्र महताब लूट की वारदात में पकड़ा गया था ब भी पुलिस ने उसके बारे में छानबीन नहीं की। एक मकान में संदिग्ध किराएदार का परिवार ठहरा है, वहां नैनीताल से दो युवक आकर रुकते हैं और धमाका हो जाता है लेकिन एलआईयू को भी पहले कोई भनक नहीं लग सकी थी। यह सरासर नैनी पुलिस और एलआईयू की लापरवाही है।

पंजाबी हाता में रामानंद और ब्रहमानंद तिवारी के मकान में हुए धमाके के बाद दो नहीं बल्कि चार लोग गायब हैं। मनोज उर्फ सलीम और उसके बेटे महताब के अलावा पता चला है कि मकान मालिक रामानंद तिवारी की पत्नी दुर्गा और साला चंदन तिवारी भी लापता हैं। दुर्गा को इस विस्फोट में हल्की चोट भी पहुंची थी। लोगों ने देखा था कि सलीम उर्फ मनोज ही दुर्गा ट्राली में अस्पताल की ओर ले गया था।

तब से न दुर्गा का पता चल रहा है न उसके भाई चंदन का। दुर्गा का पति पंडित रामानंद भी देर रात तक उसके बारे में कुछ भी नहीं बता पा रहा था। वह कहता रहा कि उसे नहीं पता कि दुर्गा कहां चली गई। सलीम और महताब के साथ ही दुर्गा और चंदन के गायब होने से पुलिस भी हैरान है। पुलिस को पड़ोसियों से पता चला है कि रामानंद ने महताब की गतिविधियों का पता चलने पर उसे घर से निकालने की कोशिश की थी मगर जब भी वह महताब को कुछ कहता तो पत्नी दुर्गा ही महताब के पक्ष में आकर झगड़ने लगती थी। ऐसे में पुलिस को शक है कि कहीं दुर्गा को महताब ही न अगवा कर ले गया हो।

नैनी के मकान में सलीम उर्फ मनोज गुप्ता के कमरे में हुआ धमाका पहले सिलडेंर फटने से माना गया था लेकिन अब यह साफ है कि विस्फोट के पीछे बारूद था। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से बारूद के अवशेष के नमूने जांच के लिए एकत्र किए हैं। आगरा की फोरेंसिक लैब में रासायनिक जांच से साफ होगा कि यह पटाखा बांधने में इस्तेमाल सामान्य बारूद था या शक्तिशाली बम बनाने के लिए घातक बारूद लाया गया था।

धमाके में मृत दो युवकों को लेकर आधी रात तक संशय बना रहा। उन दोनों की किसी ने सटीक शिनाख्त नहीं की। पहले गया कि मृतकों में किरोदार सलीम का पुत्र महताब और मकान मालिक रामानंद का साला चंदन तिवारी है। फिर रात में पुलिस ने मकान मालिक के हवाले से कहा कि मृतक सलीम और शरीफ नाम के दो युवक हैं जो कुछ दिन पहले ही सलीम उर्फ मनोज के पास आकर ठहरे थे। मगर देर रात फिर यह कहा जाने लगा कि मृतकों में एक महताब है और जबरन गलत शिनाख्त की जा रही है। ऐसे में पुलिस भी इस बाबत कुछ नहीं कह पा रही थी।
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