आग की लपटों से घिरा मड़हा। उसके अंदर सो रहा दो साल का मासूम बेटा। ऐसे में पति-पत्नी ने जान की परवाह नहीं करते हुए जलते मड़हा में छलांग लगा दी। दोनों ने आग से घिरे बिस्तर में झुलसकर चीखते बच्चे को उठाया और बाहर निकल आए। हालांकि बच्चे के साथ ही पति-पत्नी भी झुलस गए। मगर बच्चे को बचाने के लिए दंपति के साहस की गांव वालों ने बेहद सराहना की। दंपति और बच्चा अस्पताल में है।
फूलपुर क्षेत्र के सौरहा गांव में रहने वाला पूर्णमासी लाल बिंद ईंट-भट्ठा पर मजदूरी के सहारे परिवार का गुजारा करता है। शनिवार दोपहर वह भट्ठा से लौटा। फिर अपने दो साल के बेटे कमलेश को घर के बगल मड़हा में सुलाकर कर पत्नी सुरसती देवी के साथ पड़ोस में चला गया। तभी उसके मड़हा में जाने कैसे आग लग गई। पड़ोसियों ने आग देखकर शोर मचाया तो पूर्णमासी भी पत्नी सुरसती के साथ भागकर वहां पहुंचा। फूस का बना मड़हा लपटों से घिर गया था।
कोई और उपाय नहीं दिखा सुरसती और पूर्णमासी धू-धूकर जलते मड़हा में घुस गए। बच्चे को उन्होंने किसी तरह बाहर निकाल लिया लेकिन खुद बुरी तरह झुलस गए। मासूम कमलेश भी झुलस गया था। उन तीनों को आनन-फानन में फूलपुर सीएचसी ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने शहर में एसआरएन अस्पताल भेज दिया। उधर, ग्रामीणों की भरसक कोशिश के बावजूद मड़हा और उसमें रखा सारा सामान जल गया। हालांकि गांव वालों के बीच चर्चा रही कि भले ही गरीब परिवार का भारी नुकसान हुआ लेकिन दंपति ने अपने बेटे को बचा लिया।