चार दिनों से आंदोलनरत छात्रों का गुस्सा कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) कार्यालय पर फूट पड़ा। प्रतियोगियों ने कार्यालय में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। उन पर क्षेत्रीय निदेशक से दुर्व्यवहार का भी आरोप है। निदेशक की शिकायत पर पुलिस ने तोड़फोड़ करने वाले छह छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विभाग की ओर से आठ अज्ञात छात्रों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है।
सिपाही भर्ती परिणाम में संशोधन की मांग को लेकर छात्र सोमवार से आंदोलन कर रहे हैं। मांग पूरी नहीं होते देख बृहस्पतिवार को छात्र कार्यालय खुलते ही गेट फांदकर अंदर घुस गए और कुर्सियां पटकने के साथ तोड़फोड़ कर डाली। तभी पुलिस पहुंच गई। तोड़फोड़ करते पकड़े गए छात्रों में मिर्जापुर के शशिकांत मिश्र, मिर्जापर के ही शिवशंकर सिंह, सोनभद्र के राकेश कुमार, बिहार भोजपुर के जय किशोर सिंह, मिर्जापुर के अंबुज कुमार दुबे और चंदौली के मनोज कुमार यादव शामिल हैं। सभी को जेल भेज दिया गया है।
बता दें कि सिपाही भर्ती के परिणाम में मेरिट में गड़बड़ी का आरोप लगाकर एसएससी मध्य क्षेत्र कार्यालय पर उत्तर प्रदेश एवं बिहार से जुड़े अभ्यर्थी लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इन छात्रों का कहना है कि नक्सल प्रभावित जिले के होने के बाद भी उन्हें उसका लाभ नहीं दिया गया। अपनी मांग को लेकर अब तक एसएससी के पास 650 से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी हैं। आयोग की ओर से इनकी शिकायतों की आरंभिक जांच के बाद उन्हें सीआरपीएफ भर्ती बोर्ड नई दिल्ली के पास भेज दिया गया।
एसएससी मध्य क्षेत्र कार्यालय पर सिपाही भर्ती की मेरिट में गड़बड़ी का आरोप लगाकर छात्रों ने बुधवार तक 650 शिकायतें की थी, इन शिकायतों में 541 शिकायतें ही सही फार्मेट में पाई गईं। 109 अभ्यर्थी सही तरीके से शिकायत नहीं कर सके। 541 अभ्यर्थियों की शिकायतों की जांच में 394 के दावे निरस्त हो गए। यह अभ्यर्थी मेरिट में ही नहीं थे, बिना कारण दबाव बना रहे थे। 146 अभ्यर्थी ऐसे मिले जिन्होंने नक्सल प्रभावित जिले का होने का दावा आवेदन में किया था, लेकिन सीआरपीएफ ने उन्हें लाभ से वंचित कर दिया था। एसएससी ने इन शिकायतों को सीआरपीएफ के पास भेज दिया है।