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झोपड़ पट्टी में आग, 44 परिवार हुए बेघर 

Sun, 08 May 2016 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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आग से भारी नुकसान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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संगम में बंधवा हनुमान मंदिर के पास परेड मैदान के झोपड़ बस्ती में शुक्रवार देर रात लगी आग से बस्ती में भीषण तबाही हुई। आग इतनी विकराल थी कि एक दूसरे से लगी 44 झोपड़ियां जलकर राख हो र्गइं। तेज हवा के चलते आग तेजी से फैल रही थी। बस्ती के लोगों क ो सिर्फ जान बचाने का मौका मिला। वे चाह कर भी अपने पालतू जानवर और घरेलू सामान को बाहर नहीं निकाल पाए। उनकी आंखों के सामने ही सब कुछ जलकर राख हो गया। फायर ब्रिगेड की एक दर्जन से अधिक गाड़ियों को लगाने के बाद भोर में आग पर काबू पाया जा सका। सिविल लाइंस, सोरांव, किला और हंडिया से दमकल की गाड़ियां बुलानी पड़ी थीं। तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। 
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आग से 44 परिवार सड़क पर आ गए। उनके पास न रहने के लिए छत बची और न ही खाने के लिए सामान बचा है। आग से अनुमान है कि हर परिवार का लगभग तीन से पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है। सामान बाहर निकालने के चक्कर में आधा दर्जन लोग झुलस भी गए हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा। 17 बकरियां आग में जिंदा जल गईं। बस्ती का मंजर देखकर लोगों की रूह कांप गई। आग की सूचना पर एसएसपी केएस इमेनुएल, एसपी सिटी राजेश कुमार , सीओ दारागंज गणेश साहा समेत कई थानों की पुलिस मौके पर मौजूद थी। शनिवार सुबह सिविल डिफेंस, सामाजिक संगठन और प्रशासन के लोग पीड़ित परिवारों की मदद के लिए पहुंचे। आग में तबाह घरेलू सामान और झोपड़ियों को देखकर पीड़ित परिवार के लोग गमगीन हैं। 

संगम परेड मैदान में बंधवा हनुमान मंदिर के पीछे दर्जनों परिवार दशकों से झोपड़ी बना कर रहते हैं। वे संगम परेड मैदान, बंधवा हनुमान मंदिर और संगम नोज पर बिसात खाना, प्रसाद, नाश्ते का ठेला लगाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। दिन भर की मेहनत के बाद लोग अपनी झोपड़ी में सोए ही थे कि अचानक कोहराम मच गया। लोग बाहर निकले तो देखा कि चारों तरफ आग की लपटे ही दिख रही थीं। उनका अपना आशियाना भी खतरे में नजर आ रहा था, लेकिन उनके पास परिवार के लोगों को लेकर भागने के सिवा कोई दूसरा विकल्प न था। देखते ही देखते उनकी गृहस्थी जलकर राख हो गई। तबाही का यह आलम रहा कि एक दर्जन बाइक, दो दर्जन साइकिल, टीवी, फ्रिज, गैस चूल्हा, रजाई, गद्दा, गेहूं, चावल, दाल, कपड़ा, नगदी और जेवर भी जलकर राख हो गया। लोगों को कुछ भी लेकर भागने का मौका नहीं मिले।
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आग में मनीष कुमार, सूर्यनारायण, बर्फीलाल, अंबिका प्रसाद, मुन्नी देवी, विजय वर्मा, राजकुमार, अशोक निषाद, शिव प्रसाद, बिट्टी देवी, सुरेश सोनकर, जानू निषाद, सुषमा, कृष्णा देवी, सरिता, ननकी, सुनीता देवी, प्रेमपाल निषाद, खन्ना, रानी, बच्चीलाल, विजमा, मनोज, दिलीप, पप्पू, फूलपत्ती, सत्यवान, धारा, निर्मला देवी, रमेश निषाद, हरिशंकर, राजेश,चंदन और विनोद कुमार समेत 44 परिवार आग से तबाह हुआ है। 

झोपड़ी की बस्ती के ज्यादातर परिवारों के यहां खाना बनाने के लिए घरेलू गैस-सिलेंडर का प्रयोग किया जाता है। आग में आधा दर्जन से अधिक सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट रहे थे। विस्फोट इतना तेज होता था कि आसपास के इलाके भी दहल गए। अनुमान है कि आधा दर्जन से अधिक सिलेंडर भी आग में विस्फोट हुए हैं।

हरिशंकर निषाद परेड मैदान में परिवार समेत बिसात खाना की दुकान चलाते हैं। उनकी दो बेटियां कोमल और प्रीति शादी की उम्र में पहुंच चुकी हैं। हरिशंकर बेटियों के हाथ पीला करने की तैयारी कर रहे थे। जुलाई में शादी होनी है। इसके लिए वह अभी से सामान खरीदकर जुटा रहे थे, लेकिन शुक्रवार रात आग की तबाही से उनके अरमानों पर पानी फिर गया। शनिवार दोपहर वह राहत शिविर में परिवार के साथ आंखों में आंसू लिए बैठे थे। पूछने पर हरिशंकर फफक पड़े। रोते हुए कहा कि साहब अब बेटियों की शादी कैसे होगी। अब तो खाने के भी लाले पड़ गए हैं। पड़ोस के लोग हरिशंकर को रोते देख दिलासा देने के लिए आगे आए, लेकिन उनके पास हरिशंकर को सिवा सांत्वना देने के कुछ भी नहीं था। कुछ ऐसा ही हाल अन्य परिवारों का भी था। 

वहीं बगल के रहने वाले सरिता के बेटे कल्लू की दस दिन पहले ही शादी हुई थी। तब घर में हंसी खुशी का माहौल था। आग में उनकी बहू का जेवर और पूरा घरेलू सामान जलकर राख हो गया। वहीं बस्ती में रहने वाली सूरजकली रोते हुए कहने लगीं कि साठ सालों से यही उनका ठिकाना रहा, लेकिन ऐसा मंजर कभी नहीं दिखा। अब सब कुछ बर्बाद हो गया। 

बस्ती में तबाही के बाद  पीड़ित परिवार के सामने खाने का भी संकट है। ऐसे में प्रशासन के साथ सिविल डिफेंस के अनिल कुमार, अन्नू भैया और राजेंद्र तिवारी उर्फ दुकान जी और अन्य सामाजिक संगठनों के लोग पीड़ितों परिवारों के लिए राहत सामग्री लेकर पहुंचे। वह पीड़ित परिवारों के लिए खाद्य सामाग्री के साथ, कपड़ा समेत अन्य जरूरी सामानों का वितरण किया। बंधवा हनुमान मंदिर की ओर बस्ती के लोगों को दोबारा झोपड़ी बनाने के लिए बांस, बल्ली और तिरपाल मुहैया कराया जा रहा है, ताकि वे दोबारा जिंदगी शुरू कर सकें। बस्ती के लोगों का कहना था कि नरेंद्र गिरी महराज और आनंद गिरी महराज शहर में होते तो उन्हें मदद मिलती।
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