मऊआइमा में बसपा से जुड़े पूर्व ब्लाक प्रमुख मोहम्मद शमी की हत्या में नामजद मौजूदा ब्लाक प्रमुख सुधीर मौर्या, जिला पंचायत सदस्य शिप्रा के पति अभिषेक यादव समेत तीनों आरोपियों की तलाश में पुलिस ने छापेमारी की लेकिन वे पकड़ में नहीं आ सके हैं। सुधीर और अभिषेक का जुड़ाव भाजपा से होने की वजह से घटना को सियासी रंग दिया जा रहा है। हालांकि उन दोनों से शमी की सीधे दुश्मनी नहीं थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी की कोशिश हो रही है। इलाके में आरएएफ भी मुस्तैद रही। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस पहरे में शमी का शव पैतृक गांव दुबाही में दफनाया गया।
शमी के बेटे इम्तियाज ने रविवार आधी रात बाद मऊआइमा थाने में नामजद केस दर्ज कराया। इम्तियाज ने तहरीर दी कि रात करीब साढ़े आठ बजे वह ढाबा में भोजन के बाद पिता शमी के साथ फॉरच्यूनर गाड़ी में सुल्तानपुर खास स्थित मकान पहुंचा। उसके पिता शमी गाड़ी से उतर घर का गेट खोल रहे थे तभी उसी गांव में रहने वाले ब्लाक प्रमुख सुधीर मौर्या, अभिषेक यादव, दुबाही गांव निवासी जाबिर समेत एक अज्ञात व्यक्ति ने आकर उन पर फायरिंग की।
इम्तियाज के मुताबिक वह गाड़ी से उतरा तभी घर के भीतर से उसका फुफेरा भाई कमरुल भी बाहर आ गया। उन दोनों के सामने गोलियां मारकर सभी आरोपी फरार हो गए। उसके पिता की मौके पर ही मौत हो गई थी। गुस्साए लोगों ने शव उठाने से रोक दिया और कहा कि डीएम-एसएसपी आकर गिरफ्तारी तथा सुरक्षा का भरोसा दें। आखिरकार रात करीब डेढ़ बजे एसएसपी शलभ माथुर मौके पर पहुंचे और शमी के परिजनों से बात की तब जाकर करीब दो बजे समर्थक शांत हुए। शमी का शव चीरघर भेजा जा सका।
इलाके के लोगों में आक्रोश के मद्देनजर कई थानों की पुलिस, पीएसी के साथ ही रात में ही रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती कर दी गई थी। एसपी गंगापार मुन्नालाल भी सीओ सोरांव आलोक मिश्रा के साथ मौजूद रहे। दोपहर करीब दो बजे शमी के शव का पोस्टमार्टम हुआ। उनके गले में एक गोली फंसी मिली। पांच गोलियां शरीर से पार हो गई थीं। अनुमान है कि गोलियां पिस्टल या रिवॉल्वर से मारी गई थीं। शव दुबाही गांव ले जाया गया। साथ में पुलिस भी लगी रही। दुबाही गांव स्थित कब्रिस्तान में शमी को सुपुर्दे खाक किया गया। इस दौरान वहां भारी भीड़ जुट गई थी। इस बीच पुलिस ने आरोपियों ब्लाक प्रमुख सुधीर मौर्या, अभिषेक यादव तथा जाबिर के घर पर दबिश दी मगर वे मिले नहीं। अभिषेक के घर से पुलिस एक बुलेट गाड़ी उठा ले गई जो उसके चाचा की बताई गई है।
शमी हत्याकांड में नामजद ब्लाक प्रमुख सुधीर मौर्या और अभिषेक यादव भाजपा से जुड़े हैं। अभिषेक खुद को विहिप का पदाधिकारी भी बताता रहा है। उसकी पत्नी शिप्रा यादव भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य है। सपा से जुड़े शमी को हराकर ही सुधीर ब्लाक प्रमुख बना था। विधानसभा चुनाव से पहले शमी बसपा में शामिल हो गए थे। इलाके के लोगों से पता चला कि सियासी खुन्नस भले हो लेकिन शमी से उन दोनों की सीधे कोई दुश्मनी नहीं रही न कभी ऐसा झगड़ा हुआ।
तीसरा आरोपी जाबिर तो शमी के गांव दुबाही का है। उसने शमी की बहू के खिलाफ प्रधानी का चुनाव लड़ा था। पिछले साल मऊआइमा पुलिस ने उसे तमंचा के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था। थाने में उसे पुलिस ने पीटा भी था। ऐसी चर्चा है कि जाबिर को शक था कि उसे शमी के इशारे में तमंचा के साथ गिरफ्तार किया गया था। अब ये तीनों फरार हैं। अभिषेक की पत्नी शिप्रा के मुताबिक, रविवार को वह शपथ ग्रहण समारोह में शामिल लखनऊ गया था और तब से लौटा नहीं है। एसपी गंगापार मुन्नालाल के मुताबिक, नामजद आरोपियों की तलाश के साथ ही शमी के आपराधिक छवि को देखते हुए दूसरे पहलुओं पर भी जांच की जा रही है। उधर, सपा जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति सिंह यादव समेत कई नेता पोस्टमार्टम हाउस में शमी के परिजनों से मिले। उन्होंने भाजपा शासन आते ही इस कत्ल को पुलिस के लिए चुनौती बताया और सभी कातिलों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।