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दोस्त को मोहरा बनाकर लिया खून का बदला खून

Fri, 24 Jul 2015 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। नवाबगंज के मुबारकपुर में विमल यादव और उसके साथी आशीष गौतम की क्रूरता से हत्या का खुलासा करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सफारी बरामद की है। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि विमल के दोस्त संजय यादव ने पैसों के लालच में उसे बहाने से बुलाकर आशीष गौतम समेत दुश्मनों के हवाले कर दिया था, जिन्होंने उन दोनों को सफारी में मुबारकपुर कछार में ले जाकर काट डाला था। पुलिस को प्रतापगढ़ में रहने वाले तीन सगे भाइयों और सफारी ड्राइवर की तलाश है। फरार तीन भाइयों में एक सीआरपीएफ तो दूसरा बीएसएफ का सिपाही है। उन तीनों ने अपने भाई प्रापर्टी डीलर नसीम के कत्ल का बदला लेने के लिए आरोपी विमल को उसके साथी समेत मार डाला।
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तीन रोज पहले मुबारकपुर कछार में सिर विहीन दो शव मिले, जिनकी शिनाख्त होलागढ़ में पुरुषोत्तमपुर मलकिया गांव के विमल यादव उर्फ रामकुमा  और बलई मऊ गांव निवासी आशीष गौतम के रूप में हुई। वे दोनों रविवार से लापता थे। एसएसपी केएस इमैनुएल ने बताया कि पुलिस ने खरगापुर गांव के संजय यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो कत्ल का खुलासा हो गया। उससे पूछताछ के बाद चंदापुर सोरांव के रहने वाले अपराधी कलीम को भी पकड़ लिया गया। वह सफारी भी जब्त कर ली गई, जिसका कत्ल में इस्तेमाल हुआ।

सफारी में कुल्हाड़ी, चापड़, फावड़ा बरामद हुआ। कत्ल का किस्सा यूं है। 24 मार्च को सोरांव इलाके में मार्निग वॉक पर निकले रिटायर्ड सीआरपीएफ सिपाही नसीम अहमद की बम मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रतापगढ में दहियामऊ का मूल निवासी नसीम थरवई इलाके के इस्माइलगंज में रहकर प्रापर्टी डीलिंग करने लगा था। कत्ल में पता चला कि विरोधी प्रापर्टी डीलर ने सुपारी देकर विमल यादव से नसीम का कत्ल कराया था। नसीम के तीन भाई आरिफ, नफीस और मोबिन ने कत्ल का बदला लेने के लिए विमल की हत्या करने की ठानी।
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इनमें आरिफ सीआरपीएफ का सिपाही है और यहां पड़िला स्थित ग्रुप सेंटर में तैनात है। दूसरा भाई मोबीन बीएसएफ में सिपाही है। उन्होंने अपने अपराधी प्रवृत्ति के रिश्तेदार चंदापुर के कलीम से इस बारे में बात की। राइफल लूट की घटना में गिरफ्तारी के बाद कुछ ही समय पहले जेल से छूटे कलीम ने संजय यादव से संपर्क किया जो विमल का दोस्त है। संजय को लालच दिया गया कि वह विमल को उनके हवाले कर दे तो उसे दो लाख रुपये दिए जाएंगे। संजय को दस हजार रुपये एडवांस दिया गया। रविवार को विमल अपने साथी फुटवियर दुकानदार आशीष के संग शहर में उसकी बहन के यहां आया था। संजय ने उसे फोनकर सोरांव में नहर ददौली के पास बुलाया। विमल और आशीष बाइक से वहां आए तो सफारी सवार आरिफ, मोबिन, नफीस, कलीम ने उन दोनों को अंदर खींच लिया जबकि संजय उतर गया। विमल और आशीष को मुबारकपुर कछार में ले जाकर कुल्हाड़ी, चापड़, फावड़ा से काटकर हत्या कर दी गई और उनके सिर तथा कपड़े रेत में दबा दिए गए।

पुलिस की जांच में पता चला है कि विमल यादव को प्रापर्टी डीलर नसीम की हत्या के कुछ समय बाद भनक लगी थी कि उसके परिवार के लोग बदला लेने की खातिर उसे खोज रहे हैं। घबराकर वह मुंबई भाग गया था। कुछ ही दिन पहले वह मुंबई से लौटा तो संजय के जरिए कलीम और फिर मारे गए नसीम के भाइयों को खबर मिली। बस, विमल के दोस्त संजय यादव को मोटी रकम का लालच देकर दगाबाजी के लिए तैयार कर लिया गया। कत्ल के दौरान मौजूद रहे कलीम के मुताबिक, सफारी में खींचने के बाद विमल से पूछा गया कि नसीम की हत्या में कौन-कौन था।

 उसने खुद के साथ ही दोस्त आशीष का भी नाम लिया। इसलिए विमल के साथ आशीष को भी मुबारकपुर कछार में उतार मौत के घाट उतार दिया गया। सफारी में खींचने के बाद नसीम के दो भाइयों ने विमल और आशीष को अपना फौज का परिचय पत्र दिखाकर कहा कि वे लोग फोर्स के आदमी हैं। पूछताछ के लिए तुम दोनों को उठाया है। यही वजह है कि नहर ददौली से मुबारकपुर की 25 किलोमीटर की दूरी तक उन दोनों ने शोर नहीं मचाया।
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