फाफामऊ। थरवई इलाके के पूरे जीत की चकिया गांव में शुक्रवार देर रात घर के पास ट्रक चालक रमेशचंद्र (35) की हत्या कर दी गई। उसकी लाश ट्रक के पीछे पड़ी मिली। अभी यह साफ नहीं हो सका है कि उसे वहीं मारा गया या फिर कहीं और कत्ल के बाद लाश ट्रक में लाकर घर के निकट फेंक दी गई। रात में ही खबर पाकर पहुंची पुलिस ने शव को चीरघर भेज दिया। शनिवार शाम पोस्टमार्टम के बाद घर ले जाते वक्त रास्ते में 40 नंबर गुमटी के पास शव रख ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। पुलिस अफसरों ने आर्थिक मदद और कातिलों की जल्द गिरफ्तारी का भरोसा देकर मनाया।
पूरे जीत की चकिया थरवई निवासी चुन्नीलाल का पुत्र 35 वर्षीय रमेशचंद्र ट्रक चलाकर गुजारा करता था। परिवार में पत्नी संगीता और तीन बेटे सचिन, छोटे और अनुज हैं। 15 जून से वह पड़ोसी गांव जैतवारडीह के शिवकुमार यादव का ट्रक चलाने लगा था। 21 जून को वह ईंट लादकर रीवा गया था। वहां से शुक्रवार शाम रमेश प्याज लादकर मुंडेरा मंडी पहुंचा। वहां किसी व्यापारी की आढ़त पर प्याज उतारने के बाद उसने रात करीब साढे़ आठ बजे पत्नी संगीता को फोन किया और बताया कि वह घर के लिए रवाना हो रहा है, मगर फिर वह घर नहीं पहुंचा। रात करीब एक बजे बिजली सजावट का काम करने वाले करिया ने घर से निकट ही ट्रक के पीछे रमेश को अचेत पड़ा देखा तो उसके परिजनों को बताया। रमेश को फाफामऊ में दो निजी अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसे मृत बता दिया गया।
फिर 100 नंबर पर सूचना दी गई तो रात में सीओ फूलपुर के साथ थरवई थाने की पुलिस वहां पहुंची। पुलिस ने रमेश का शव रात में ही पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। उसके गुप्तांग पर चोट थी। साथ ही शरीर पर ऐसे जख्म थे जैसे उसे घसीटा गया हो। शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम में पता चला कि उसकी मूत्र थैली फट गई थी। सिर पर भी चोट थी। चीरघर से शव लेकर रवाना हुए परिजनों और ग्रामीणों ने शाम करीब पांच बजे थरवई इलाके के चालीस नंबर गुमटी के पास तिराहे पर लाश रखकर चक्काजाम कर दिया। खबर मिलते ही सीओ फूलपुर कृष्ण गोपाल सिंह वहां पुलिस फोर्स के साथ आ गए। एसडीएम सोरांव भी पहुंच गए। परिजनों को कातिलों की जल्द गिरफ्तारी, कृषक बीमा के तहत पांच लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से अनुदान दिलाने का भरोसा देकर एक घंटे बाद पुलिस ने जाम खत्म कराया।
रहस्मय ढंग से मौत के घाट उतारे गए रमेश के सबसे छोटे पुत्र अनुज का शनिवार को जन्मदिन था, मगर अनहोनी देखिए कि बेटे के जन्मदिन के रोज ही रमेश की अर्थी उठी। रमेश की पत्नी संगीता तीनों बेटों के साथ रोती-कलपती रही। उसकी तो जिंदगी ही अंधेरी हो गई है।