छात्र दिलीप कुमार सरोज के मुख्य हत्यारोपी निलंबित टीटीई विजय शंकर सिंह का अपराधों से पुराना नाता रहा है। मारपीट, हेकड़ी दिखाने की उसकी आदत रही है। इससे पहले भी उसकी कुछ घटनाओं में संलिप्तता का पता चला है। इस आधार पर पुलिस सुल्तानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी में उसकी हिस्ट्रीशीट खंगालने में जुट गई है। ताकि उस पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
हत्यारोपी विजय शंकर सिंह पुत्र राधेश्याम सिंह निवासी सेमरौना थाना कूड़ेभार जिला सुल्तानपुर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अपराधों से जुड़े उसके पुराने रिश्तों को खंगाल रही है। कूड़ेभार थाना में उसके विरुद्ध धारा 523, 504, 506 के तहत दर्ज मुकदमे का पता चला है। अपने गांव में ही उसने पूर्व में मारपीट के बाद किसी को जान से मारने की धमकी दी थी। एसएसपी ने बताया कि पूर्व में झूंसी में हुए संत ज्ञानेश्वर हत्याकांड में भी इसके नामजद होने की बात आ रही थी लेकिन छानबीन के दौरान पता चला कि संत ज्ञानेश्वर पर गोली चलाने वाला विजय शंकर दूसरा था। अब इस दिलीप की निर्मम हत्या के बाद उसकी हिस्ट्रीशीट पुलिस खंगाल रही है। टीटीई वाराणसी में तैनात था और इलाहाबाद के कर्नलगंज में जहरुल हसन रोड स्थित किराए के मकान में रहता था। इसलिए पुलिस इन तीनों जिलों के अलावा आसपास के इलाकों में उसकी अपराधिक घटनाओं में संलिप्तता का पता लगा रही है।
टीटीई ने फर्जी आईडी पर खरीदा था सिम
छात्र की हत्या का मुख्य आरोपी टीटीई विजयशंकर ने पुलिस को छकाने के लिए एक नया सिम खरीदा था। इसके जरिए वह फरारी के दौरान अपने परिचितों, खैरख्वाहों से संपर्क साधे हुए था।
पुलिस सूत्रों की मानें तो छात्र दिलीप की मौत के बाद शहर से निकलते ही विजयशंकर ने अपना मोबाइल ऑफ कर दिया था। सुल्तानपुर पहुंचने के बाद उसने फर्जी आईडी पर एक सिम लिया। वह अच्छी तरह जानता था कि पुराने नंबर पर बात करने पर पुलिस उस तक आसानी से पहुंच जाएगी। यही वजह रही कि उसने पुलिस से बचने को नई तरकीब निकाली। वह इस नए नंबर से अपने परिचितों से संपर्क करता था। हालांकि इसके तुरंत बाद मोबाइल स्विच ऑफ कर देता था। सूत्रों की मानें तो यही वजह रही कि इसे पकड़ने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी।