औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था।
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तकरीबन इक्कीस साल पहले मौजूदा सपा विधायक विजमा यादव के पति जवाहर पंडित के कत्ल से जुड़े साक्ष्य गायब होने के मामले में सिविल लाइंस थाने में मुकदमा लिखा गया है। अदालत में मामला उजागर होने के बाद बुधवार को इस वारदात की विवेचना करने वाले सीबीसीआईडी वाराणसी के तत्कालीन इंस्पेक्टर एके निगम, सिपाही कलीम और सिविल लाइंस थाने के मालखाना प्रभारी के खिलाफ थाने में जमा माल गायब करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
इलाहाबाद में प्रतापपुर सीट की सपा विधायक विजमा यादव के पति जवाहर पंडित को अगस्त 1996 में सिविल लाइंस में महात्मा गांधी मार्ग पर काफी हाउस के पास दिनदहाड़े गोलियों से छलनी कर दिया गया था। घटना में पूर्व बसपा सांसद कपिलमुनि करवरिया, उनके भाई पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया और पूर्व भाजपा विधायक उदयभान करवरिया समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। कुछ अरसा बाद इस घटना की विवेचना सीबीसीआईडी को सौंप दी गई थी।
बरसों तक इस हत्याकांड में चार्जशीट ही नहीं दाखिल हो सकी थी। इधर कुछ साल में इसमें तेजी आई। इसी हत्याकांड में सरेंडर करने के बाद पिछले करीब डेढ़ साल से तीनों करवरिया बंधु नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं। हाल ही में मुकदमे के ट्रायल के दौरान अदालत में उजागर हुआ कि हत्याकांड में बतौर साक्ष्य सिविल लाइंस थाने के मालखाना में रखे कारतूस और खोखा गायब हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों को जांच और कार्रवाई का आदेश जारी हुआ। बुधवार को सिविल लाइंस थाना प्रभारी महेश पांडेय की ओर से सीबीसीआईडी वाराणसी सेक्टर के इंस्पेक्टर एके निगम, सिपाही मोहम्मद कलीम और तत्कालीन मालखाना प्रभारी हरिराम चौधरी के खिलाफ धारा 409 के तहत साक्ष्य में रखे कारतूस और खोखा गायब करने का केस लिखा गया।