उसने लिखा कि पढ़ाई के दौरान उसके दिमाग में बार-बार अनचाहे विचार और शंकाएं आती थीं। किसी विषय को अच्छी तरह पढ़ लेने के बाद भी मन उसे दोबारा पढ़ने और समझने के लिए मजबूर करता था। ऐसा नहीं करने पर परीक्षा में गलती होने या असफल होने का डर सताता था। वह बार-बार चीजें दोहराती और चेक करती थी। इससे कुछ समय के लिए राहत मिलती, लेकिन थोड़ी देर बाद वही विचार और शंकाएं फिर लौट आती थीं।
ऋतु के आठ पेज के सुसाइड नोट में उसने खुद को असहाय, कमजोर और आत्मविश्वास की कमी से घिरा हुआ महसूस करने की बात भी लिखी। उसे लगता था कि वह दूसरों से पीछे रह गई है और जीवन के लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगी। उसने सवाल किया कि आखिर उसके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है। वह सामान्य जिंदगी जीना, शांत दिमाग से पढ़ाई करना और अपने कॅरिअर के लक्ष्य हासिल करना चाहती थी।
ऋतु के परिजनों को सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे नीट की तीसरे राउंड की काउंसिलिंग का परिणाम मिला था। इसमें उसे सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में ईडब्ल्यूएस-दिव्यांग (ईडब्ल्यूपीएच) कोटे के तहत एमबीबीएस की सीट आवंटित हुई थी। उसकी आंखों में परेशानी थी, जिसके चलते उसका दिव्यांगता प्रमाणपत्र बना था। इसके बावजूद वह मानसिक परेशानी से जूझ रही थी।
ऋतु ने वर्ष 2022 में प्रयागराज के दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) से हाईस्कूल और 2024 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उसने नीट की तैयारी शुरू की। वर्ष 2026 की परीक्षा में उसकी ऑल इंडिया रैंक 10,74,272 आई थी।
ऋतु के पिता देवराज शर्मा ने बताया कि वह रातभर अपने कमरे पढ़ाई करती थी और अगले दिन नींद पूरी कर दोपहर दो से ढाई बजे के बीच कमरे से बाहर आती थी। सोमवार को जब वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली तो परिवार के लोगों ने खिड़की से अंदर झांककर देखा। कमरे में ऋतु का शव खून से लथपथ पड़ा हुआ था। सूचना पर पुलिस पहुंची और जांच शुरू की। कमरे से आठ पेज का सुसाइड नोट भी मिला।
इसी बीच ऋतु के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि उसने रविवार की देर रात दो से ढाई बजे के बीच अपने पिता के पिस्टल से खुद को गोली मारी थी। ऐसी भी आशंका है कि उसने तीन गोली चलाई थी। दो गोलियों के निशान कमरे की अलमारी पर मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, झूंसी पुलिस का कहना है कि मौके से गोली का एक ही खोखा मिला है तो उसके सिर से आरपार हुई थी।
ऋतु के पिता डॉ. देवराज शर्मा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। उनके पास लाइसेंसी पिस्टल और राइफल है। ऋतु का जुड़वा भाई ऋषिराज देहरादून के एक कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। बहन के मौत की जानकारी उसे मिली तो वह बदहवास हो गया। मंगलवार की सुबह वह घर पहुंचा। पिता देवराज और बेटा ऋषिराज एक-दूसरे से गले लिपकर ऋतु को यादकर बिलखने लगे।
पिता और भाई बार-बार यही कहे जा रहे थे कि आखिर ऋतु तुमने ऐसा क्यों किया। कोई तकलीफ थी तो बताया क्यों नहीं। पिता देवराज ने बताया कि रविवार की रात बेटी ने हम दोनों के साथ बैठकर खाना खाया। इसके बाद वह गुड नाइट बोलकर अपने कमरे में चली गई। तब तक ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि बेटी अगले कुछ घंटों में इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठा लेगी।
डॉक्टरों के पैनल और वीडियोग्राफी के बीच ऋतु के शव का पोस्टमार्टम मंगलवार की दोपहर में हुआ। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। बाद में पिता देवराज, भाई ऋषिराज, चाचा और अन्य परिजनों ने ऋतु के शव का अंतिम संस्कार दारागंज घाट पर किया। उसके शव को पोस्टमार्टम हाउस से सीधे दारागंज घाट ले जाया गया था।
इसी बीच ऋतु के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि उसने रविवार की देर रात दो से ढाई बजे के बीच अपने पिता के पिस्टल से खुद को गोली मारी थी। ऐसी भी आशंका है कि उसने तीन गोली चलाई थी। दो गोलियों के निशान कमरे की अलमारी पर मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, झूंसी पुलिस का कहना है कि मौके से गोली का एक ही खोखा मिला है तो उसके सिर से आरपार हुई थी।