मुगलसराय के शाहकुटी मजार निवासी शबीना ब्रह्मपुत्र मेल के एस-8 कोच में शुक्रवार को घंटों चिल्लाती रही कि उसकी बच्ची बीमार है। डॉक्टर को बुलाओ। सुबह 8.31 बजे ट्रेन इलाहाबाद पहुंची तो वह अपने रिश्तेदारों के साथ सीधे स्टेशन अधीक्षक कार्यालय पहुंच गई। वहां भी वह चिल्लाई कि मेरी बच्ची बीमार है। उसे इलाज की जरूरत है।
शबाना के साथ उसके रिश्तेदार मुर्तजा (22), मकसूद (15) एवं अन्य यात्रियों ने भी डिप्टी एसएस से कहा कि जल्द से जल्द डॉक्टर को बुलाया जाए। हालांकि, उस वक्त बच्ची के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। डिप्टी एसएस कामर्शियल ने सुबह 8.38 बजे इसकी सूचना रेलवे अस्पताल को दी। पांच मिनट इंतजार करने के बाद शबाना अपनी बच्ची तैमूर को लेकर वहां से रोते बिलखते अपने रिश्तेदारों के साथ काल्विन चली गई। इस बीच सुबह 8.49 बजे रेलवे अस्पताल के चिकित्सक डॉ. महेश पहुंचे। तब तक शबाना वहां से जा चुकी थी। काल्विन अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा तैमूर को मृत घोषित कर दिए जाने के बाद शबाना वहां बेसुध हो गई। किसी तरह उसके परिजनों ने उसे संभाला। बाद में वे सभी सड़क मार्ग से मुगलसराय के लिए रवाना हो गए।
डिब्रुगढ़ से दिल्ली जाने वाली ब्रह्मपुत्र मेल का इलाहाबाद आने का समय शाम 7.15 बजे है, जो 13 घंटे से भी ज्यादा विलंब से शुक्रवार की सुबह 8.31 बजे इलाहाबाद पहुंच सकी। ट्रेन में सवार यात्रियों का कहना था कि बृहस्पतिवार को मुगलसराय पहुंचने के पूर्व ही ब्रह्मपुत्र मेल नौ घंटे लेट थी। वहां इसके पहुंचने का समय शाम 4.34 बजे है जो रात 1.32 बजे पहुंची।
इसके बाद ट्रेन की लेटलतीफी और बढ़ती चली गई। रेलवे की समयसारिणी में ब्रह्मपुत्र मेल मुगलसराय से शाम 4.54 बजे चलकर शाम 7.15 बजे इलाहाबाद पहुंचती है। कुल 149 किलोमीटर की यह दूरी ब्रह्मपुत्र मेल 2.21 घंटे में तय करती है, लेकिन बृहस्पतिवार वाली ब्रह्मपुत्र को यह दूरी तय करने में सात घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया। ब्रह्मपुत्र मेल ही नहीं तमाम मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें मुगलसराय से इलाहाबाद के बीच घंटों लेट हो जाती हैं। बीते चार दिनों के दौरान एक भी दिन ब्रह्मपुत्र मेल समय से इलाहाबाद नहीं आई है। इस बारे में उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बंसल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को तेज आंधी और बारिश की वजह से गैपुरा और बम्हरौली के पास सिगनल में खराबी आ गई थी। इसका असर संबंधित पर चलने वाली ट्रेनों के संचालन पर पड़ा। उन्होंने बताया कि इस रूट पर ट्रेनों की भारी आवाजाही है। सिगनल में आई खराबी की वजह से यहां एक के पीछे एक ट्रेनें लेट होती चली गई।
मुगलसराय से इलाहाबाद के बीच ट्रेनों की लेटलतीफी कोई नहीं बात नहीं है। शुक्रवार को भी इस रूट पर चलने वाली तमाम ट्रेनें घंटों देरी से इलाहाबाद पहुंचीं। इसमें कुछ ट्रेनें ऐसी भी रहीं जो मुगलसराय में तो महज पांच से दस मिनट ही लेट रही, लेकिन इलाहाबाद आते-आते उनकी लेटलतीफी घंटों में हो गई। अफसर भी रटा-रटाया जवाब देते हैं कि संबंधित रूट पर क्षमता से ज्यादा ट्रेनों का संचालन हो रहा है। फिर भी ट्रेनों की लेटलतीफी रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद स्टेशनों के आउटरों पर ट्रेनों को रोक लिए जाने की वजह से भी यात्रियों को खासी दिक्कत होती है।
शुक्रवार को इस रूट पर चलने वाली 12311 कालका मेल की बात करें तो वह मुगलसराय से सुबह 6.30 बजे की बजाय 6.57 बजे इलाहाबाद के लिए चली। ढाई घंटे में मुगलसराय से इलाहाबाद के बीच की दूरी कालका मेल तय करती है, लेकिन शुक्रवार को इसे छह घंटे लग गए जो सुबह नौ बजे की बजाय दिन में तकरीबन एक बजे यहां पहुंची। कमोवेश यही स्थिति 12307 हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस की भी रही। जोधपुर भी 2.25 घंटे की बजाय 5.30 घंटे में मुगलसराय से जंक्शन पहुंच सकी। इसके पूर्व 13007 तूफान एक्सप्रेस जो मुगलसराय में 35 मिनट लेट थी, इलाहाबाद आते-आते पांच घंटे लेट हो गई। 12987 सियालदाह-अजमेर एक्सप्रेस ने भी निर्धारित दूरी 2.15 घंटे की बजाय छह घंटे में पूरी की।