किसान नेता जितेंद्र पटेल की हत्या सराय इनायत के उमेश पाल ने नहीं बल्कि माफिया अतीक के इशारे पर उनके गुर्गों ने की थी। यह खुलासा थाना धूमनगंज पुलिस की जांच में हुआ है। विवेचना के बाद इंस्पेक्टर धूमनगंज अरुण कुमार त्यागी की ओर से शुक्रवार को सीजेएम की अदालत में अतीक अहमद के खिलाफ बी वारंट की अर्जी दी गई है। जिस पर शनिवार को फैसला हो सकता है। पुलिस के मुताबिक जितेंद्र की हत्या करने में अतीक के गुर्गे जुल्फकार उर्फ तोता, अकरम, अरशद और आसिफ उर्फ दुर्रानी के खिलाफ सबूत मिले हैं।
पिछले साल 11 जून को सूबेदारगंज में सराय इनायत के जितेंद्र पटेल की गोली मारक र हत्या कर दी गई थी। हत्या की वजह उमेश पाल से जमीनी विवाद बताया गया था। इस मामले में उमेश पाल और उसके भाई को नामजद किया गया था। उमेश पाल ने इस हत्या कांड में अपने को निर्दोष साबित होने के विवेचना अधिकारी को सबूत दिए थे। विवेचना अधिकारी ने तथ्यों के आधार पर पाया कि उमेश पाल और उसके भाई को गलत नामजद किया गया था।
पुलिस जांच के अनुसार माफिया अतीक के जमीनी धंधों में जितेंद्र पाल अवरोधक बना हुआ था। इसीलिए अतीक अहमद ने अपने गुर्गों से जितेंद्र पाल की हत्या करा दी थी। इस हत्या में पुलिस ने सराय इनायत के जुल्फिकार उर्फ तोता, अकरम, अरशद और आसिफ को अतीक के इशारे पर गोली चलाने का दोषी माना है। इसीलिए अतीक पर 147,302,148,149 और 120 बी का मुकदमा चलाया जाएगा। साथ ही उनके खिलाफ बी वारंट तामील कराने के लिए अदालत में प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। चार अन्य आरोपियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है।