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शिव मंदिर के पुजारी की हत्या और लूटपाट

Mon, 17 Jul 2017 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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बदमाशों ने शनिवार रात बंतरिया गांव स्थित शिव मंदिर के पुजारी नेपाली बाबा की फावड़े से हत्या के बाद कुटी में लूटपाट की। रविवार सुबह लोगों ने बाबा का खून सना शव देखा तो भीड़ जुटी और पुलिस पहुंची। जांच में जुटी बहरिया पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है।
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 बंतरिया गांव में सोरांव-फूलपुर मार्ग पर है यह शिवमंदिर। लगभग तीन साल पहले नेपाल से आए 55 वर्षीय साधु ने मंदिर की देखभाल शुरू की थी। नेपाल का होने की वजह से लोग साधु को नेपाली बाबा के नाम से पुकारने लगे। सावन महीने में मंदिर में विशेष कार्यक्रम चल रहा था। शनिवार रात तकरीबन 11 बजे भजन-कीर्तन समाप्त होने पर लोग घर लौटे तो नेपाली बाबा भी मंदिर के बगल स्थित अपनी कुटिया के सामने तख्त पर मच्छरदानी लगाकर सो गए। रविवार भोर में कुछ लोग मंदिर की तरफ गए तख्त के बगल में बाबा का रक्तरंजित शव देख सन्न रह गए। उनकी गर्दन और सिर पर फावड़े से वार किए गए थे। काफी मात्रा में खून बहा था। कुछ दूरी पर खून सना फावड़ा पड़ा था। बाबा की हत्या की खबर फैली तो मंदिर पर सैकड़ों लग जुट गए।

थाना प्रभारी बहरिया अश्वनी कुमार भदौरिया चौकी इंचार्ज सिकंदरा अविनाश कुमार के साथ आ गए। फिर एसपी गंगापार सुनील सिंह और सीओ फूलपुर अभिनव कनौजिया ने भी आकर निरीक्षण किया। घटनास्थल पर खोजी कुत्ता और फील्ड यूनिट टीम को भी बुलाकर छानबीन की गई। बाबा की कुटिया का दरवाजा खुला था। ताला टूटा पड़ा था। अंदर सामान बिखरे थे। ऐेसे में शक है कि बदमाश ताला तोड़कर लूटपाट कर रहे थे तभी बाबा की नींद खुल गई। पहचाने जाने पर बदमाशों ने फावडे़ से बाबा को मार डाला। ग्रामीणों से पता चला कि नेपाली बाबा सावन में मंदिर पर भंडारा करने के लिए लोगों से चंदा जुटा रहे थे। पुलिस ने शक के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस का मानना है कि इलाके के अराजक तत्वों ने यह वारदात अंजाम दी है।
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बहरिया। शिवमंदिर के पुजारी नेपाली बाबा की बेरहमी से हत्या ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है। तीन साल में नेपाली बाबा ने मंदिर का कायाकल्प कर दिया था। सुबह मंगला आरती से लेकर सारे कार्यक्रम विधि-विधान से होते थे। लोगों का बाबा के प्रति लगाव बढ़ने लगा था। मंदिर पर भक्तों की भीड़ भी जुटने लगी थी। कुछ माह पहले बाबा ने ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर पर यज्ञ और भंडारा भी किया था। बताया जाता है कि तीन साल पहले नेपाल में बाढ़ आने पर बाबा यहां आकर मंदिर पर रहने लगे थे। बाबा बहुत ही विनम्र स्वाभाव के थे और भगवान की सेवा तथा भजन में लगे हते थे। उनका किसी से कोई बैर भाव नहीं था। बाबा की हत्या से लोग बहुत दुखी हैं। दस साल पहले मंदिर के पुजारी धनुषगिरि महाराज की भी करेंट लगने से मृत्यु हो गई थी।
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