इलाहाबाद। ट्रेनों में यात्रियों के ढाई सौ से ज्यादा मोबाइल फोन चुराने वाले शातिर युवक को जंक्शन पर जीआरपी ने चेकिंग के दौरान दबोच लिया। उसके पास एक दर्जन महंगे मोबाइल फोन बरामद हुए। पूछताछ में उसने कुबूला कि वह इलाहाबाद से कानपुर के बीच ट्रेनों में चोरी करने के बाद मोबाइल फोन मिर्जापुर ले जाकर बेचता था। उसने बताया कि वह दो साल से अक्सर ट्रेन में मोबाइल और पर्स चुराता रहा है।
जीआरपी थाना प्रभारी मनोज सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार भोर में वह उपरनिरीक्षक कैलाशपति सिंह के साथ प्लेटफार्म नंबर एक वीआईपी गेट के पास चेकिंग कर रहे थे तभी लगभग 19 साल का एक युवक उन्हें देखकर भागने लगा। उसे हिरासत में लेकर तलाशी ली गई तो बारह मल्टीमीडिया मोबाइल फोन बरामद हुए। ढाई हजार रुपये नगद भी मिले। उसने अपना नाम ओमप्रकाश पांडेय उर्फ झलाखर पांडेय बताया। वह मिर्जापुर के लालगंज इलाके में पंचायत भवन के पीछे रहता है।
पूछताछ में उसने बताया कि वह दो साल पहले दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में नौकरी करने गया था, मगर वहां उसे पैसे कम और काम ज्यादा लगा तो वह घर लौटने लगा। ट्रेन में वह एक सपेरे से मिला जो लोगों को नाग दिखाने के बहाने रात में मोबाइल चुरा लेता और बाद में बेच देता था। सपेरे ने उसे बताया कि आधी रात वह ट्रेन में सीट पर सो रहे यात्री को हल्का से हिलाता और गहरी नींद में सोने का इत्मीनान होने के बाद उसकी जेब से मोबाइल चुरा लेता। बस, तभी से झलाखर भी ट्रेनों में मोबाइल चुराने लगा। वह मिर्जापुर से इलाहाबाद आता। फिर यहां से प्रयागराज एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, शिवगंगा एक्सप्रेस में किसी एक में कानपुर तक जाता।
कानपुर से पहले जब लोग नींद में होते तो वह मोबाइल चुराकर कानपुर जंक्शन पर उतर जाता। फिर दूसरी ट्रेन से वापस आ जाता। महज कक्षा नौ तक पढ़े झलाखर ने बताया कि दो साल में उसने ट्रेनों में ढाई सौ से ज्यादा मोबाइल फोन चुराए। उसने मिर्जापुर के लालगंज इलाके में तमाम दुकानदारों, छात्रों, ग्राम प्रधान और एक ब्लाक प्रमुख को भी चोरी का मोबाइल फोन बेचा। अब तो वह लोगों से बकायदा मॉडल पूछकर उन्हें चोरी का मोबाइल फोन सप्लाई करने लगा था।