टीईटी अभ्यर्थी की हालत बिगड़ी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
प्रदेश सरकार की ओर से चल रही 72825 शिक्षकों की भर्ती में कोर्ट के आदेश के बाद भर्ती से वंचित टीईटी पास दूसरे अभ्यर्थियों को गुमराह किया जा रहा है। टीईटी मोर्चे के नेताओं ने उनसे चंदा लेकर आंदोलन को गलत दिशा में ले जाने का काम किया है, जबकि सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने इन अभ्यर्थियों के साथ न्याय करने का आश्वासन दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर टीईटी से जुड़े नेताओं ने प्रदेश के दूर-दराज के अभ्यर्थियों को गुमराह किया कि सभी टीईटी पास लोगों को नौकरी मिलेगी और इन्हें एक मई को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर धरने में बुला लिया।
इन नेताओं ने दो मई को आमरण अनशन शुरू कर दिया। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इस मामले कोई महत्व नहीं दिए जाने पर टीईटी भर्ती से जुड़े नेताओं ने शाम होने तक कार्यालय पर ताला लगा दिया। इससे परेशान होकर सचिव कार्यालय के कर्मचारियों ने आंदोलनकारियों पर मुकदमा दर्ज करवा दिया।
पुलिस ने जब आंदोलनकारियों को सचिव कार्यालय से भगा दिया तो टीईटी से जुड़े कुछ नेताओं ने जीपीओ चौराहे पर एक बार फिर से टीईटी अभ्यर्थियों को भड़का दिया। पुलिस ने टीईटी अभ्यर्थियों की ओर से जवाबी कार्रवाई किए जाने के बाद लाठीचार्ज कर दिया। टीईटी अभ्यर्थियों को गुमराह करने वाले इन नेताओं पर आरोप है कि वह चंदा वसूल कर अपना काम सीधा करने में लगे हैं। यह नेता जब से शिक्षक भर्ती शुरू हुई है तभी से किसी न किसी आंदोलन के नाम पर अभ्यर्थियों से वसूली कर रहे हैं, आज तक इनका चयन नहीं हो सका है।
मंगलवार को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर आंदोलन केदौरान पुलिस की लाठीचार्ज में घायल और जेल में बंद टीईटी अभ्यर्थी अजय शंकर सूर्यवंशी को जेल से रिहा होने के बाद सृजन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जेल में बंद तीन अभ्यर्थियों को जमानत मिल गई।
टीईटी पास अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट अंबेडकर प्रतिमा के सामने धरना देकर शिक्षा निदेशालय पर हुए लाठीचार्ज की न्यायिक जांच की मांग की है। उधर, अधिवक्ताओं ने भी टीईटी अभ्यर्थियों पर रात के अंधेरे में लाठीचार्ज करने को मानवाधिकार का उल्लंघन बताया है।