सिविल लाइंस में एक कंपनी बनाकर नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों के गोलमाल का मामला सामने आया है। कंपनी के मैनेजर उसकी पत्नी समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत की गई है कि कंपनी के लोगों ने करीब 14 लोगों से 40 लाख की ठगी की है। पुलिस का कहना है कि जांच शुरू हो गई है। जल्द कार्रवाई की जाएगी।
राम प्रिया रोड कर्नलगंज निवासी गिरजा शंकर पांडेय की नवाब यूसुफ रोड सिविल लाइंस स्थित एक कंपनी के मैनेजर विनोद कुमार से किसी ने कुछ महीने पहले जान पहचान कराई थी। विनोद कुमार की बातों में आकर गिरजा शंकर ने अपने भतीजे अच्युतानंद पांडेय की नौकरी दिलाने के नाम छह लाख दस हजार रुपये चेक तथा नकद के माध्यम से दे दिए लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं लगी तो गिरजा शंकर रुपये की मांग करने लगे। इस पर मैनेजर विनोद कुमार ने कहा कि जब तक नौकरी नहीं दे पाते, दो फीसदी ब्याज हर महीने देंगे। कंपनी के डायरेक्टर तौफीक इस्लाम सिद्दीकी तथा कुछ अन्य लोगों की मौजूदगी में इसका एग्रीमेंट भी किया गया।
कुछ महीने तो ब्याज दिया गया, बाद में वह भी बंद हो गया। कई बार प्रयास के बाद भी जब गिरजा शंकर की बात नहीं सुनी गई तो वे गुुरुवार को आईजी जोन केएस प्रतापकुमार के पास पहुंचे। आईजी को पूरे कागजात दिखाए। आईजी ने सिविल लाइंस इंस्पेक्टर को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दे दिए। देर रात तक पुलिस टाल मटोल करती रही। इसके बाद आईजी को फिर फोन किया गया। इसके बाद सिविल लाइंस में विनोद सिंह, उनकी पत्नी नीलू सिंह, फुरकान अहमद, तहसीन सिद्दीकी, तौसीफ इस्लाम सिद्दीकी, आशीष श्रीवास्तव, गयासुद्दीन और संजय बोस के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। गिरजा शंकर द्वारा यह भी बताया कि कंपनी ने न सिर्फ उनके साथ बल्कि उनके जैसे 14 अन्य लोगों से भी नौकरी दिलाने के नाम पर 40 लाख रुपयों का गोलमाल किया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस एके त्यागी ने बताया कि जांच शुरू हो गई है। जल्द ही सब कुछ साफ हो जाएगा।