शहर के जीवन ज्योति अस्पताल में मंगलवार भोर एसी में शार्ट सर्किट से लगी आग से पहली मंजिल पर बी ब्लॉक आईसीसीयू वार्ड में भर्ती 6 मरीजों और उनके तीमारदारों की जान पर बन आई। धुएं और अंधेरे में फंसे मरीज और उनके तीमारदार मदद की गुहार लगाते रहे लेकिन अस्पताल के कर्मचारी वार्ड से गायब हो गए। सूचना पर पहुंची कीडगंज पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही। अस्पताल में चारों तरफ अफरातफरी और दहशत का माहौल रहा। फायर ब्रिगेड के पहुंचने के बाद मरीजों और उनके तीमारदारों को सकुशल बाहर निकाला गया। शहर के बड़े अस्पताल में आग की सूचना पर कमिश्नर, सीएमओ सीओ, एसपी सिटी समेत कई डॉक्टर मौके पर पहुंच गए। हादसे की स्थिति से निबटने के लिए एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम भी बुला ली गई थी लेकिन ऐसी नौबत नहीं आई।
मंगलवार भोर जीवन ज्योति अस्पताल के पहली पर स्थित पर आईसीसीयू वार्ड में एसी में शार्ट सर्किट के चलते आग लग गई। कुछ देर में वार्ड में चारों तरफ धुआं फैल गया। भोर का समय होने के चलते ज्यादातर लोग नींद में थे। कुछ ही देर में अस्पताल में अफरातफरी मच गई। वार्ड में आगे की तरफ चार मरीज भर्ती थे। जिन्हें बाहर निकालकर दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। अंदर के हिस्से में भर्ती छह मरीज पुष्पा मुट्ठीगंज, शिवकुमारी टीपी नगर, रामबहादुर चित्रकूट, हरीलाल बदलापुर जौनपुर, सुरेश कुशवाहा कोरांव, जया कुशवाहा मुट्ठीगंज और उनके तीमारदार फंसे रहे।
वे मदद की गुहार लगा रहे थे। अंदर फंसे मरीजों और तीमारदारों को बाहर निकालने के लिए आग वाले कमरे से होकर गुजरना था। कमरे में भीषण धुआं था। जिसके चलते उसके दरवाजे को बंद कर दिया गया था। उधर आईसीसीयू वार्ड में फंसे मरीज और तीमारदार चीख-पुकार रहे थे। तीमारदारों ने वार्ड में रोशनदान के शीशे को तोड़ दिया लेकिन किसी की भी हिम्मत अंदर फंसे मरीजों को बाहर निकालने की नहीं हो रही थी। अस्पताल के कर्मचारी मौके से गायब हो गए। सूचना पाकर कीडगंज पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। फायरमैनों ने सामने के दरवाजे से अंदर घुसने का प्रयास किया लेकिन धुआं देखकर हिम्मत नहीं जुटा सके। तब फायर ब्रिगेड की गाड़ी को पेठा वाली गली से वार्ड के पिछले हिस्से की ओर ले जाया गया। रोशनदार के रास्ते से तीमारदार बचाव की गुहार लगा रहे थे। फायरमैन धर्मेंद्र कुमार मिश्र ने साहस का परिचय देते हुए लैडर लगवाया और रोशनदान के रास्ते वार्ड तक पहुंचे।
फायरमैन को देखकर मरीजों और तीमारदारों को कुछ उम्मीद दिखी। यहां भर्ती सभी छह मरीज ऑक्सीजन पर थे। जिसके चलते उन्हें ऐसे बाहर निकालना फायरमैन के बस की बात नहीं थी। तब फायरमैन धर्मेंद्र मिश्र ने जिस कमरे में धुआं फैला था, उसमें पानी डाला। तब धुआं कम हुआ। इसके बाद वार्ड का दरवाजा खोलकर मरीजों को बाहर निकाला गया। तकरीबन दो घंटे बाद पूरी तरह से आग बुझा ली गई। अस्पताल में आग की सूचना पर कमिश्नर राजन शुक्ला, सीएमओ, एसपी सिटी राजेश कुमार, सीओ आलोक मिश्र, सीओ बैरहना समेत कई थानों की पुलिस पहुंच गई थी।
अस्पताल में आग से बचाव के लिए जगह-जगह अग्निशमन उपकरण रखे हुए थे लेकिन बेकार साबित हुए। तीमारदारों का कहना था कि कुछ ही अग्निशमन उपकरण चले। अस्पताल में आग से बचाव के उपकरण भी नहीं थे। इस बात को लेकर लोगों में आक्रोश था।
रामबाग स्थित जीवन ज्योति अस्पताल में मंगलवार भोर लगी आग की घटना के जांच के लिए जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट एसपी श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक कमेटी गठित कर दी है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि अस्पताल में आग की वजह क्या थी। अस्पताल में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम है कि नहीं। जांच टीम में एसीएम, सीओ, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी और मुख्य अग्निशमन अधिकारी शामिल हैं। जांच टीम अपनी रिपोर्ट तीन दिन के भीतर जिलाधिकारी को देगी।