मथुरा में एसपी सिटी और थानेदार की हत्या के पांच रोज बाद ही इलाहाबाद में भी मंगलवार सुबह हमले में आईपीएस गणेश साहा गंभीर रूप से जख्मी हो गए। नैनी जेल गेट पर हुए दोहरे हत्याकांड में मारे गए ज्ञानचंद्र की लाश को परिजनों ने रहिमापुर तिराहे पर रखकर चक्काजाम कर दिया। बेटे के अंतिम संस्कार के लिए पेरोल पर जेल से पिता को न छोड़ने पर वे गाड़ियों में तोड़फोड़ करने लगे।
खबर पाकर आईपीएस वहां पहुंचे तो उन्हें भी घेरकर पीटने के साथ ही सिर पर पत्थर मार दिया गया। बचाने के लिए फायर करने पर एक थानेदार पर भी हमला बोल दिया। उनकी पिस्टल छीनने की कोशिश की। पथराव में आईपीएस की गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिसवाले किसी तरह उन्हें गाड़ी में लेकर अस्पताल भागे। पुलिस ने पथराव के जवाब में फायरिंग और लाठीचार्ज किया। ग्रामीणों के हमले में कई पुलिसवाले घायल हुए। बाद में डीएम-एसएसपी के नेतृत्व में फोर्स ने छापेमारी करते हुए पुलिस पर हमले और बवाल में 32 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
नैनी जेल गेट के निकट रविवार दोपहर बाद घेरकर फायरिंग में मारे गए शेरडीह की प्रधान सरस्वती देवी के बेटे ज्ञानचंद्र का शव सोमवार शाम पोस्टमार्टम के बाद से घर के बाहर रखा था। परिजन अड़े थे कि हत्या में मारे गए ज्ञानचंद्र के पिता पूर्व प्रधान चंद्रभान को नैनी जेल से अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लाया जाए। चंद्रभान कत्ल में सजायाफ्ता कैदी है। डीएम ने चंद्रभान को अंत्येष्टि के लिए जेल से निकालने की अर्जी खारिज कर दी तो परिजनों ने कहा कि वे मंगलवार सुबह ज्ञानचंद्र का अंतिम संस्कार करेंगे। रात भर पुलिस बल की निगरानी में शव रखा रहा। मंगलवार सुबह परिजन फिर कहने लगे कि जेल से चंद्रभान को लाए जाने पर ही अंतिम संस्कार होगा। पुलिस अफसरों ने लाचारी जाहिर की तो परिवार के लोग थाने में जमा असलहे और शस्त्र लाइसेंस दिलाने की मांग करने लगे।
उनकी पुलिस से झड़प होने लगी। वे घर से ज्ञानचंद्र की अर्थी उठाकर बढ़े और पथराव करते हुए झूंसी-सहसों मार्ग स्थित रहिमापुर तिराहे पर रखकर चक्काजाम कर दिया। मौजूद पुलिस बल ने रोकने की कोशिश की तो ग्रामीण मारपीट पर उतारू हो गए। वहां से गुजर रहे वाहनों पर भी पथराव शुरू कर दिया। वायरलेस सेट पर खबर पाकर सीओ पंचम (ट्रेनी आईपीएस) गणेश साहा फूलपुर पुलिस के साथ वहां आए। उन्होंने गाड़ी से उतरकर ट्रक पर वार कर रहे व्यक्ति से लाठी छीनी तभी महिलाओं-पुरुषों ने उन पर हमला कर दिया । उनसे मारपीट की। चश्मा तोड़ दिया। कुछ दूर पर मौजूद पुलिस बल ने आईपीएस को पिटता देख फायरिंग की तो भीड़ उस तरफ दौड़ी। इधर पत्थर से हमले में आईपीएस गणेश का सिर फट गया। फूलपुर थाना प्रभारी उन्हें गाड़ी में बैठाकर भागे। अफसरों को घटना की जानकारी देकर उन्हें एसआरएन अस्पताल भेजा गया। कमिश्नर समेत कई अफसर उन्हें देखने अस्पताल पहुंचे।
उधर, आईपीएस पर हमले के बाद एसपी क्राइम कई थानों की पुलिस, पीएसी, आरएएफ के साथ वहां पहुंचे और चक्काजाम कर रहे लोगों को हटाकर शव उठवाने का प्रयास किया। मगर भीड़ ने पथराव कर पुलिस को खदेड़ लिया। कुछ दूर भागने के बाद पुलिस बल ने पलटवार किया। रबर बुलेट और सरकारी असलहों से फायरिंग के साथ ही लाठीचार्ज कर पुलिस ने उपद्रवियों को दौड़ा लिया। महिलाओं को भी जमकर पीटा। भीड़ समेत परिवार के लोग शव छोड़कर भाग गए। पुलिस ने शव उठाकर दारागंज गंगा घाट भेज दिया। कुछ देर बाद डीएम संजय कुमार और एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने आकर पुलिस बल के साथ चक्काजाम स्थल से भागे लोगों की तलाश में शेरडीह में छापेमारी की। 32 लोगों को बवाल और पुलिस पर हमले में गिरफ्तार कर लिया गया।
रहिमापुर तिराहे पर भीड़ से घिरे आईपीएस गणेश साहा की जान खतरे में देख कुछ दूर पर तैनात मऊआइमा थानाध्यक्ष सुनील दुबे ने पिस्टल निकालकर फायरिंग करते हुए ललकारा। उनके इशारे पर दूसरे पुलिसवालों ने भी हवाई फायरिंग की तो भीड़ आईपीएस को छोड़ उनकी तरफ दौड़ी। कई महिलाओं ने भी थानेदार को घेरकर खींचतान की। उनसे पिस्टल छीनने की कोशिश की। महिलाओं पर पुलिस हाथ उठाने से बच रही थी जिसका नतीजा यह हुआ कि कुछ दूर खड़े पुरूषों ने पुलिसवालों पर पथराव कर दिया। इसमें कई पुलिसवाले जख्मी हुए। मऊआइमा थानाध्यक्ष सुनील दुबे के मुताबिक, आईपीएस गणेश साहा को उग्र भीड़ ने जिस तरह से घेर रखा था अगर वह फायरिंग नहीं करते थे उनकी जान खतरे में पड़ जाती।