इलाहाबाद। तंबाकू कारोबारी सुभाष चंद्र केसरवानी के घर घुसे डकैत बोलचाल से स्थानीय लग रहे थे। वह सुभाष को अंकल कह रहे थे। सुभाष को धमकाया भी था कि खामोश रहो। अगर जिंदगी रही तो और पैसे कमा लोगे। शोर मचाया तो जान से हाथ धोना पड़ सकता है। डकैतों की उम्र 25 से 30 वर्ष के आसपास बताई जा रही है। डकैतों ने चेहरे को ढक रखा था और घर की लाइट भी नहीं जलाई थी। लूटपाट टार्च की रोशनी में की गई। अंधेरे की वजह से ही सुभाष यह नहीं देख पाए कि डकैतों की संख्या कितनी थी। यह भी आशंका है कि कुछ बदमाश घर के बाहर भी थे।
डकैत तोड़े गए मेन गेट से निकले या छत के रास्ते कूदकर, यह अभी स्पष्ट नहीं है। भागने से पहले डकैतों ने सुभाष के घर के बाहर खड़ी इनोवा को भी पंक्चर कर दिया था। डकैत सुभाष के साथ ही ड्राइवर संतोष का मोबाइल फोन उठा ले गए। जूतों के निशान दीवारों पर भी मिले हैं।
ड्राइवर के पहली मंजिल के कमरे तक डकैत घर के भीतर की सीढ़ी के रास्ते से ही पहुंचे। ड्राइवर ने पुलिस को बयान दिया है कि गमछे से उसका हाथ-पांव बांधने के बाद मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया था। हालांकि पुलिस को उसका बयान पच नहीं रहा। उसके कमरे से पुलिस को शराब की बोतलें मिली हैं। उसके कमरे से ही संजीता का शॉल भी बरामद हुआ। शॉल उसके कमरे में कैसे पहुंचा, इसको लेकर वह गोलमोल जवाब दे रहा है। डकैतों ने सुभाष के बेटे को छोड़कर, ड्राइवर को ही क्यों बंधक बनाया, इस बात का जवाब अब तक तलाशा नहीं जा सका है।
डकैत रात में तीन बजे के आसपास घर में दाखिल हुए और आधे घंटे तक रहे। सुभाष के बेटे सार्थक को इसकी भनक तक नहीं लगी। सार्थक दिल्ली में रहकर बीबीए की पढ़ाई करता है और 25 दिसंबर को छुट्टियों में घर आया था। आशंका है कि डकैतों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि सार्थक घर में था। हालांकि पुलिस अफसर हर पहलू की जांच कर रहे हैं।
पिछले वर्ष हुई कई डकैतियां आज तक नहीं खुल पाई हैं। मधवापुर में रहने वाले रिटायर्ड डीआईजी स्टांप एसएन श्रीवास्तव के घर भी पिछले वर्ष डकैतों ने धावा बोल दिया था। परिवार को बंधक बनाने के बाद लूटपाट की गई थी। फाफामऊ में 40 नंबर गुमटी, अल्लापुर में बीमा कर्मी, झूंसी में शिक्षक के घर डकैैती का भी आज तक खुलासा नही हो सका है।
डकैत सुभाष के कमरे को खंगालने के बाद 315 बोर का एक कारतूस गिरा गए। कारतूस के सहारे पुलिस क्लू तलाशने की कोशिश कर रही है। पुलिस को घर में कामकाज के लिए आने जाने वालों पर भी शक है। पुलिस ने सुभाष से घर में आए दिन आने वाले लोगों की सूची भी मांगी है। हालांकि ड्राइवर को ही पुलिस प्रमुख संदिग्ध मान रही है। यह तय है कि डकैत घर से अच्छी तरह वाकिफ थे।