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हाईकोर्ट के भीतर मार दूंगा, कोई नहीं बचा पाएगा

Fri, 30 Jun 2017 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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रास्ते के विवाद में गई महिला की जान - फोटो : demo pic
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धूमनगंज के मरियाडीह में लगभग दो साल पहले हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड की नए सिरे से तफ्तीश शुरू होने पर इस घटना में मारे गए सुरजीत पटेल की पत्नी प्रीति और भाई गगन ने आला अफसरों से शिकायत की है कि अतीक अहमद के करीबी आबिद ने उन्हें हाईकोर्ट के भीतर मार देने की धमकी दी है। चार रोज पहले गगन के कत्ल की कोशिश गई की तो वह किसी तरह खेतों में भागकर जान बचा सका। प्रीति और गगन ने शासन और यहां एसपी कौशाम्बी और एसएसपी इलाहाबाद को प्रार्थनापत्र देकर आबिद और उसके गुर्गों समेत सीओ चायल महेंद्र सिंह देव (तत्कालीन थाना प्रभारी धूमनगंज) के खिलाफ कार्रवाई तथा सुरक्षा की फरियाद की है। एसपी पिपरी वीके मिश्र ने अमर उजाला से कहा कि घटना की एफआईआर लिखकर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सीओ चायल एमएस देव ने घटना की जानकारी से ही इनकार कर दिया।
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25 सितंबर 2015 बकरीद की रात करीब आठ बजे मरियाडीह गांव में आबिद प्रधान की गाड़ी में उसकी चचेरी बहन अलकमा तथा ड्राइवर सुरजीत सिंह पटेल को गोलियों से छलनी कर दिया गया था। आबिद ने इस घटना में विरोधियों इंतिखाब आलम, कम्मू, जाबिर समेत सात लोगों के खिलाफ कत्ल का केस लिखाया हालांकि घटना को संदिग्ध माना गया था। पुलिस ने सभी आरोपियों पर ईनाम घोषित किया लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। आरोपियों के परिवार के लोगों ने बार-बार अफसरों से मिलकर कहा कि यह कत्ल आबिद ने ही विरोधियों को फंसाने के लिए कराया है। मारा गया सुरजीत सिंह पटेल कौशाम्बी में पिपरी के दरियापुर गांव का रहने वाला था। उसकी पत्नी प्रीति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की जिसके बाद 30 मई को अदालत ने बिना किसी दबाव के दोहरे हत्याकांड की निष्पक्ष जांच का आदेश दिया। एसएसपी के आदेश पर धूमनगंज थाना प्रभारी ने घटना की नए सिरे से जांच शुरू की है। आरोपियों पर घोषित ईनाम भी निरस्त कर दिया गया है।

चार रोज पहले 25 जून को हत्याकांड में मारे गए सुरजीत के भाई गगन ने एसपी कौशाम्बी को प्रार्थनापत्र भेजा कि उसकी भयाहू प्रीति की याचिका पर हाईकोर्ट से दोहरे कत्ल की दुबारा जांच का आदेश होने के बाद आबिद और उसके गुर्गे उनकी हत्या की कोशिश में लगे हैं। 24 जून की रात लगभग 7.30 बजे दरियापुर के करीब रास्ते में आबिद प्रधान, बल्लू, फरहान, अकबर, एजाज अख्तर, जावेद, फैसल, माजिद, शेरू, पप्पू, अबू बकर ने उसे घेर लिया और धमकाया कि तुम्हें हाईकोर्ट में ही मार डालेंगे, देखते हैं कौन तुम्हें बचाता है। जिंदा रहना है तो चलकर वकील के यहां दस्तखत कर दो। आबिद और उसके गुर्गों ने असलहे ताने तो वह खेत में कूदकर भाग गया। तकरीबन दो घंटे तक खेतों में छिपे रहने के बाद वह घर गया फिर कुछ लोगों के साथ पिपरी थाने पहुंचा।
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गगन का आरोप है कि पिपरी पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने जा रही थी मगर सीओ चायल महेंद्र सिंह देव ने आकर रोक दिया और कहा कि इसने दोहरे हत्याकांड में मेरे खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है इसलिए अब ये हाईकोर्ट ही जाया करे। उल्लेखनीय है कि 2015 में दोहरे कत्ल के वक्त देव ही धूमनगंज थाना प्रभारी थे। गगन और उसकी भयाहू प्रीति ने देव पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पिछले दिनों प्रीति ने एसएसपी को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि उसके पति सुरजीत को आबिद, फरहान, अकबर, जावेद, फैसल, माजिद, त्रिवेणी सिंह उर्फ बबलू ने उसकी आंखों के सामने घर से उठाकर अलकमा के साथ गाड़ी में गोलियों से छलनी कर मार डाला था। प्रीति के अनुसार दूसरे रोज उसने धूमनगंज थाने जाकर आबिद समेत अन्य के खिलाफ तहरीर देनी चाही लेकिन तत्कालीन थाना प्रभारी एमएस देव ने यह कहकर मना कर दिया कि ज्यादा हल्ला करोगी तो बच्चों समेत जान और इज्जत से हाथ धो बैठोगी। उसी रात आबिद प्रधान समेत कई लोगों ने घर में घुसकर मार डालने की धमकी दी।

प्रीति ने प्रार्थनापत्र में लिखा है कि भू-माफिया रामलोचन  यादव तथा राजू पाल हत्याकांड के आरोपी आबिद के प्रभाव में इंस्पेक्टर एमएस देव ने तफ्तीश में कई तथ्यों की अनदेखी कर दी। गाड़ी के भीतर कत्ल में अलकमा के शरीर पर 17 और सुरजीत के शरीर पर गोलियों के 13 घाव थे। घावों के पास बारूद चिपका था जिससे साफ है कि गोलियां एकदम करीब से मारी गई थीं जबकि आबिद ने कहा था कि शूटरों ने 30-35 फुट की दूरी से फायर किए थे। गाड़ियों के अंदर खोखे मिले थे। मगर जांच में इन तथ्यों को छिपा लिया गया था। प्रीति ने आबिद और तत्कालीन थाना प्रभारी धूमनगंज एमएस देव की नारको एनालिसिस टेस्ट की मांग की है।
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