बच्ची के गुनहगार को मौत की सजा
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पुलिस विभाग में दरोगा बनने की ख्वाहिश नहीं पूरी होने से निराश अमृता सिंह ने आत्महत्या कर ली। उसने मंगलवार रात पुलिस लाइन में ससुर एचसीपी महेश सिंह के निवास पर जहर खा लिया। इलाज के दौरान एसआरएन अस्पताल में उसकी सांस थम गई। खबर पाकर बलिया से मायके वाले भी आ गए। बलिया जनपद के उदयपुर सिकंदरापुर निवासी महेश सिंह पुलिस विभाग में एचसीपी हैं। उनकी तैनाती पुलिस लाइन इलाहाबाद में गणना शाखा में है। उन्होंने बेटे आमोद कुमार सिंह का ब्याह वर्ष 2011 में बलिया में ही बैरिया इलाके की अमृता से किया था।
अमृता की एक बेटी पांच साल की पीहू है। पति आमोद मीडिया में कार्यरत है। अमृता (29) यहां सास-ससुर के साथ रहकर पुलिस विभाग में दरोगा भर्ती की तैयारी में जुटी थी। उसकी दरोगा बनने की बेहद ख्वाहिश थी, मगर उसे भर्ती परीक्षा में सफलता नहीं मिल रही थी। उसने कुछ समय पहले भी दरोगा भर्ती की परीक्षा दी थी। मंगलवार को नतीजा आया तो पता चला कि वह परीक्षा में पास नहीं हो सकी। इसके बाद वह बेहद दुखी थी। रात में पुलिस लाइन स्थित अपने ससुर के सरकारी निवास में अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। पता चला कि उसने जहर निगल लिया है। अमृता को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान रात में उसने दम तोड़ दिया। शव को चीरघर में रख दिया गया।
कर्नलगंज थाने की पुलिस को सूचना मिली तो उपनिरीक्षक सलाउद्दीन ने पोस्टमार्टम हाउस जाकर पंचनामा भरा। हालांकि, बुधवार को देर होने की वजह से पोस्टमार्टम नहीं हो सका। उपनिरीक्षक सलाउद्दीन के मुताबिक, अमृता का एक भाई विकास मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस तीसरे साल की पढ़ाई कर रहा है। ससुर एचसीपी महेश सिंह के मुताबिक, उनकी बहू अमृता का इरादा था कि वह दरोगा पद पर भर्ती हो जाए तो आर्थिक रूप से मजबूती मिल जाएगी। उसे समझाते थे कि सफलता नहीं मिले तो दुखी होने की जरूरत नहीं, क्योंकि परिवार का ख्याल रखने के लिए वह खुद सक्षम हैं, लेकिन उसे नाकामी से ठेस पहुंची थी।