पत्थर गली में बृहस्पतिवार रात बाइस साल के कारोबारी गुफरान उर्फ गप्पू की दुकान में गोली मारकर हत्या की वारदात से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। कुछ ही मिनटों के भीतर घटनास्थल पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। आलम यह था कि भीड़ में गुस्से को देख पुलिसवाले भी घबराए हुए थे कि कहीं तेलियरगंज की तरह यहां भी लोग कातिलों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए बवाल पर उतारू न हो जाएं। शाहगंज थाने से तकरीबन आधा किलोमीटर दूर इस घटना के बाद आधा दर्जन थानों की पुलिस फोर्स वहां तैनात कर दी गई। गनीमत रही कि लोग गमगीन मगर शांत रहे।
गुफरान ने पत्थर गली में घर से बमुश्किल 100 मीटर दूर एक मकान में किराए की दुकान में पहले फुटवियर शॉप फिर जनरल स्टोर खोला था। महज बीस साल की उम्र में वह अपना खर्च निकालने के अलावा परिवार के भी गुजारे में मदद करने लगा था। बाकी दोनों भाई इमरान और दिलशाद जीरो रोड पर जूते-चप्पल की दुकानें चलाते हैं। पिता के इंतकाल के बाद ये तीनों बेटे मां मुन्नी बेगम का सहारा बने रहे। तीन बेटियों में दो का ब्याह हो चुका है। इन्हीं तीनों भाइयों पर छोटी बहन के निकाह की जिम्मेदारी थी। अब सबसे छोटा गुफरान जाने किस रंजिश में किन लोगों का शिकार हो गया है। पुलिस को पता चला कि गोली मारने के बाद कातिल पल्सर बाइक पर नखासकोहना की तरह भागे थे।
कई लोगों ने इस बात की पुष्टि की है लेकिन कोई भी बदमाशों के बारे में सटीक जानकारी नहीं दे पाया। मौके पर फील्ड यूनिट ने भी आकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस घटनास्थल के पास हमीदिया इंटर कॉलेज तथा कुछ दुकानों-मकानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक कर रही है ताकि कातिलों का हुलिया दिख सके। परिजन और आसपास के लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर गुफरान से किसकी रंजिश थी जो मार डाला। वह सीधे स्वाभाव का लड़का था।
कुछ अरसा पहले पति रियाज अहमद के इंतकाल के बाद गम में डूबी मुन्नी बेगम बेटों तथा अविवाहित छोटी बेटी के साथ गुजारा कर रही थीं। वह जल्द से जल्द छोटी बेटी के हाथ पीले करने की सोच रही थीं। मगर बृहस्पतिवार रात छोटे दुलारे बेटे गुफरान की हत्या से उन्हें गहरा आघात पहुंचा। पहले वह रोती-चीखतीं रही फिर गुमसुम हो गई। परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि शुक्रवार सुबह उन्हें पोस्टमार्टम कराकर शव सौंप दिया जाए।