इलाहाबाद। शहर के राजरूपपुर मोहल्ले में साठ फीट रोड चौराहे पर बृहस्पतिवार रात हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव के चचेरे भाई संजय मिश्र (35) को मार गोली मार दी गई। गोली लगते ही संजय सड़क पर गिर पड़ा। चौराहे पर मौजूद लोगों ने गोली मारने वालों को दौड़ाकर दबोच लिया। जमकर धुनाई करने के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया। घायल संजय को एसआरएन अस्पताल लाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वकील के भाई की हत्या की खबर से खलबली मच गई। वकीलों की भीड़ और आक्रोश को देखकर कई थानों की फोर्स और पुलिस के आला अफसर एसआरएन पहुंच गए।
नवाबगंज के कक रहिया के रहने वाले प्रभाशंकर मिश्र हाईकोर्ट में वकील हैं। वह हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव भी हैं। उनका चचेरा भाई संजय मिश्र कानपुर में एक फोटो लैब में नौकरी करता था। वह बृहस्पतिवार को कानपुर से अपने घर ट्रांसपोर्टनगर आया था। रात में वह चचेरे भाई से मिलने प्रभाशंकर मिश्र के राजरूपपुर स्थित घर गया था। वहां से मिलकर लौट रहा था। साठ फीट रोड चौराहे पर संजय के दोस्त जटा और अतुल मिल गए। वह खड़ा होकर उनसे बात करने लगा।
तभी राजरूपपुर मोहल्ले के पूर्वांचल चौराहे का रहने वाला खुल्दाबाद बाल सुधार गृह का कर्मचारी सुभाष राय बाइक से आ गया। सुभाष का चौराहे पर खड़े ड्राइवर कल्लू से किसी बात को लेकर झगड़ा होने लगा। झगड़ा होते देख संजय बीचबचाव करने गया। इस पर सुभाष संजय पर भड़क गया। उसने संजय को धमकाते हुए कहा कि ज्यादा नेता मत बनो। इस बात को लेकर संजय और सुभाष के बीच कहासुनी होने लगी तो सुभाष ने पिस्टल निकाली और संजय को गोली मार दी। गोली संजय के पेट में लगी तो वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा।
गोली मारते ही संजय के दोस्त सुभाष पर टूट पड़े। सुभाष की लात घूंसों से जमकर धुनाई कर दी। गोली चलने से मोहल्ले में खलबली मच गई। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। सूचना पाकर धूमनगंज पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने आरोपी सुभाष को गिरफ्तार कर लिया। खून से लथपथ संजय को अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव के भाई की गोली मारकर हत्या की खबर सुनकर एसआरएन अस्पताल में वकीलों की भीड़ जुट गई।
वकीलों में खासा आक्रोश था। संजय के मौत की खबर उसके घर पहुंची तो कोहराम मच गया। संजय दो भाइयों में बड़ा था। छोटे भाई वरूण मिश्र की फाफामऊ में फोटो स्टेट की दुकान है। परिवहन विभाग के रिटायर कर्मचारी संजय के पिता राम सुंदर का बेटे की मौत से रो-रोकर बुरा हाल था। संजय के सात साल का एक बेटा है। पति की मौत से पत्नी रूचि की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।