थरवई इलाके के शेख अहमदपुर गांव में मंगलवार रात घर लौट रहे दलित बुजुर्ग लालचंद्र को कुछ लोगों ने जिंदा जला दिया। बुजुर्ग हैंडपंप पर हाथ धो रहा था तभी दुश्मनों ने मिट्टी का तेल डालने के बाद आग लगा दी। चीख सुनकर जुटे परिजनों ने एंबुलेंस में शहर लाकर अस्पताल में भर्ती कराया जहां कुछ घंटे बाद उसने दम तोड़ दिया। चार लोगों के खिलाफ केस लिखा गया है। वे सभी फरार हो गए हैं।
शेख अहमदपुर गांव निवासी दलित परिवार के लालचंद्र (65) की पत्नी का देहांत हो चुका था। उसकी कोई संतान नहीं थी। वह बड़े भाई जवाहर लाल के साथ रहकर गुजारा कर रहा था। मंगलवार को परिवार के ज्यादातर लोग एक शादी समारोह में शामिल होने शहर गए थे। घर में जवाहरलाल और लालचंद्र थे। रात में भोजन के बाद लालचंद्र घर के बाहर निकला था। वह हैंडपंप पर हाथ धुलने गया। तभी बड़े भाई जवाहरलाल ने उसकी चीख सुनी।
वह बाहर निकला तो हैंडपंप के पास लालचंद्र को आग की लपटों से घिरा देखा। उसी बस्ती के मिश्रीलाल, रामचंद्र, मनीलाल, छोटेलाल ने ही लालचंद्र पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। परिजन तथा आसपास के लोगों को आता देख वे भाग गए। आग बुझाने तक में लालचंद्र 70 फीसदी झुलस गया था। 108 नंबर की एंबुलेंस बुलाकर उसे शहर में एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। वहां भोर में लालचंद्र की सांस थम गई।
बुजुर्ग को जिंदा जलाकर मारने की खबर से पुलिस में खलबली मच गई। बुधवार सुबह एसपी गंगापार राजेश श्रीवास्तव भी सीओ फूलपुर रविशंकर प्रसाद और थानाध्यक्ष थरवई कमलेश कुमार के साथ मौके पर पहुंचे। परिजनों से बातचीत में पता चला कि चक रोड के विवाद में दुश्मनों ने ऐसी हैवानियत की है। ग्राम सभा की तरफ से निकाली जा रही चक रोड के रास्ते में लालचंद्र के भतीजे बसपा नेता दीपचंद्र सरल का मकान है। उसने चक रोड का विरोध किया तो दूसरे पक्ष के लोगों ने दबाव बनाया कि मकान तोड़कर रास्ता बनाया जाए। यही विवाद गर्माया था। दीपचंद्र ने सरायइनायत थाने में चार लोगों के खिलाफ जलाकर मारने का केस लिखाया है। हत्या में नामजद सभी आरोपी मंगलवार रात घटना के बाद से ही फरार हैं।