अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव की दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद उनके परिजनों को सांत्वना देने के लिए सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शुक्रवार को रामबाग पहुंचे। यहां उन्होंने मृतक अधिवक्ता के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढाढ़स बंधाया। कहा कि संकट की इस घड़ी में वे उनके साथ हैं। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान उन्होंने अधिवक्ता की पत्नी आभा श्रीवास्तव को परिजनों की मौजूदगी में 20 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा। उन्होंने अधिवक्ता के रो रहे दोनों बच्चों आयुषी और आभास के सिर पर भी हाथ फेरा। इस दौरान अधिवक्ता की पत्नी को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग परिजनों ने की। इस पर केशव ने उचित कार्रवाई की बात कही।
दिन में एक बजे के आसपास रामबाग स्थित अधिवक्ता के घर पहुंचे केशव मौर्य को देखते ही उनके परिजन फूट-फूट कर रोने लगे। केशव ने अधिवक्ता के दोनों भाइयों को सांत्वना दी। इसके बाद घर के अंदर उनकी पत्नी एवं वहां मौजूद लोगों को आश्वस्त किया कि दुख की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है। सभी आरोपी जल्द ही जेल के अंदर होंगे। 20 लाख का चेक देने के बाद उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सहायता राशि है। इस सहायता राशि से किसी की जिंदगी वापस नहीं ला सकते, लेकिन इतना जरूर कि आगे भी सरकार से जो बन पड़ेगा वह हर संभव मदद की जाएगी। वहां स्थानीय लोगों ने आरोपी होटल मालिक द्वारा नाले पर किए गए अतिक्रमण की शिकायत भी की। इस पर केशव ने कहा कि उचित कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता, अरुण अग्रवाल, अमरनाथ तिवारी, विधायक विक्रमाजीत मौर्य, प्रवीण पटेल, संजय गुप्ता, दिलीप श्रीवास्तव, दीपक पटेल, विक्रमजीत सिंह भदौरिया, रवि केसरवानी, सुरेंद्र चौधरी आदि मौजूद रहे।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लौटते वक्त कुछ देर के लिए अधिवक्ता के घरवालों की नाराजगी भी झेलनी पड़ी। दरअसल आर्थिक मदद का चेक देकर डिप्टी सीएम जैसे ही लौटने लगे, घरवालों ने उनसे निवेदन किया कि वह एक बार उस स्थान को देख लें, जिस पर अतिक्रमण के चलते यह पूरा विवाद हुआ। इस पर डिप्टी सीएम ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की जांच शुरू करा दी गई है। साथ ही जांच अधिकारी ने मौका मुआयना भी कर लिया है। इतना कहकर डिप्टी सीएम अपने वाहन में बैठ गए तो अधिवक्ता के घरवाले उनकी गाड़ी के सामने खड़े हो गए। उनकी मांग थी कि डिप्टी सीएम बार चलकर अपनी आंखों से देख लें कि होटल मालिक ने किस तरह सरकारी नाले पर अतिक्रमण किया हुआ है। हालांकि डिप्टी सीएम इसके लिए राजी नहीं हुए और पुलिसकर्मियों ने घरवालों को हटा दिया। इसके बाद डिप्टी सीएम रवाना हो गए। उनके इस रवैये पर परिजनों के साथ ही स्थानीय लोगों में नाराजगी भी रही।
अधिवक्ता की हत्या के दूसरे दिन भी परिजन बिलखते रहे। उधर ढांढस बंधाने वालों का भी दिनभर तांता लगा रहा। जैसे ही परिवार के लोगोें से कोई घटना के बारे में पूछता, उनकी आंखें भर आतीं। घटना के बारे में बताते-बताते आंसुओं की धारा बहने लगती। उधर, दोनों बच्चों की हालत देखकर तो ढांढस बंधाने पहुंचे लोगों की भी आंखें नम हो गईं। मृतक अधिवक्ता राजेश के भाइयों प्रेमशंकर और बृजेश से जो भी मिलता, वह उनके गले लिपटकर रोने लगते। उधर, पत्नी आभा और बच्चों की हालत देखकर सभी का कलेजा मुंह को आ जा रहा था। डिप्टी सीएम के सामने भी परिजन फूट-फूटकर रोए। उनकी हालत देख डिप्टी सीएम केशव भी भावुक हो गए। सबसे ज्याद बुरा हाल बच्चों का था। बेटा आभास और बेटी आयुषी रह-रहकर बिलखने लगते थे। यही कहते रहे कि पापा कहां चले गए। बच्चों को बिलखता देख सभी की आंखें डबडबा गईं।
अधिवक्ता की हत्या पर परिजनों के साथ ही मोहल्ले के लोग भी बेहद गमगीन दिखे। पड़ोस में ही रहने वाले विभोर श्रीवास्तव ने बताया कि राजेश का कभी कोई व्यक्तिगत विवाद रहा ही नहीं। वह सिर्फ लोगों की भलाई के लिए आवाज उठाते थे और इसी वजह से लोग उनसे खुन्नस रखने लगे। इसी तरह राजेश के घर से कुछ दूरी पर रहने वाले रामजी जैन ने बताया कि राजेश उनके लिए बड़े भाई की तरह थे। जब कभी भी किसी तरह की जरूरत हुई, वह साथ खड़े मिले। मोहल्ले के लोगों की समस्याओं के लिए उन्होंने कई बार आवाज उठाई। ऐसे इंसान के साथ कोई इतना बुरा कर सकता है, यह कभी सोचा भी नहीं था।