लालगोपालगंज (इलाहाबाद)। नवाबगंज इलाके में बृहस्पतिवार सुबह बस की चपेट में आने से टाटा सूमो सवार महिला, उसके बेटे और ड्राइवर की मौत हो गई। महिला कौशाम्बी के कोखराज इलाके से बहू को विदा कराने के लिए उसके घर के पास पहुंची तभी लखनऊ हाइवे पर अनहोनी हो गई। पांच लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घटना के बाद गुस्साए लोगों ने बस में तोड़फोड़ कर लखनऊ हाइवे पर चक्काजाम कर दिया। आगजनी का भी प्रयास किया। मौके से बस ड्राइवर भाग गया था। नवाबगंज थाना पुलिस ने पहले तो समझाया फिर लाठी पटककर लोगों को सड़क से हटाया।
खुदा बख्श का पूरा गांव नवाबगंज के नफीस अहमद की बेटी मंतशा बानो का निकाह बीते रविवार को कोखराज (कौशाम्बी) के सुभना बसेढ़ी गांव निवासी लल्लन के बेटे टेंट हाउस संचालक शमीम से किया गया था। दूसरे रोज मंतशा को ससुराल से वापस मायके लाया गया था। बृहस्पतिवार को उसे दुबारा ससुराल के लिए विदा किया जाना था। मंतशा की विदाई की खातिर ससुरालियों ने टाटा सूमो किराए पर ली थी। सुबह करीब दस बजे सूमो में मंतशा की सास जरीना बानो और जेठ शकील अहमद उर्फ बबलू समेत आठ लोग रवाना हुए।
करीब 10.35 बजे वे लखनऊ रोड पर मंतशा के घर के बिल्कुल निकट पहुंचे तभी सामने से आ रही बस ने अचानक दाहिने आकर सूमो में जबरदस्त टक्कर मार दी। गलती पूरी तरह बस ड्राइवर की थी। टक्कर के बाद बस से उतरकर ड्राइवर भाग गया। सूमो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। चीख-पुकार मच गई। मंतशा के परिजन समेत आसपास के लोग भागकर सूमो तक पहुंचे और उनमें फंसे लोगों को किसी तरह बाहर निकाला। जरीना (55) की मौत हो चुकी थी। उसके जेठ बबलू (35), चचेरा देवर मोहम्मद तौसीफ (18), ननद तसलीमा (16), नरगिस (20), अकमल (12), आदिल (10) और सूमो ड्राइवर रितराज सिंह उर्फ रामू (25) भी गंभीर रूप से जख्मी थे।
उन्हें दूसरी गाड़ी से शहर में बेली अस्पताल ले जाया गया जहां ड्राइवर रितूराज को मृत घोषित कर दिया गया। बबलू, नरगिस और अकमल की हालत चिंताजनक बनी थी। कुछ देर बाद जेठ बबलू ने भी दम तोड़ दिया। उधर, घटना से गुस्साए लोगों ने बस पर धावा बोला तो उसमें बैठे महिलाएं-पुरुष उतरकर भाग गए। फिर भीड़ ने बस में तोड़फोड़ कर दी। आग भी लगाने का प्रयास किया। साथ ही चारपाइयां और दूसरे अवरोधक रखकर लखनऊ मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। शृंग्वेरपुर चौकी प्रभारी आए मगर भीड़ के गुस्से को देख दूर ही खड़े रहे। कुछ देर बाद नवाबगंज थानाध्यक्ष रामआशीष उपाध्याय ने आकर लोगों को मनाने की कोशिश की। फिर भी वे हंगामा करते रहे तो लाठी पटककर उन्हें सड़क से हटाया। इस बीच खबर पाकर जरीना के परिवार के लोग भी आ गए। तीन मौतों से कोहराम मच गया।
खुदा बख्श गांव नवाबगंज के नफीस अहमद और कोखराज के सुभना बसेढ़ी गांव निवासी लल्लन के घर में रविवार को शादी के बाद से खुशियों का डेरा था। मगर बृहस्पतिवार सुबह की घटना ने ऐसा आघात दिया कि खुशियां छिन्न-भिन्न हो गईं। शादी के बाद दुलहन की दुबारा विदाई के लिए शमीम की मां जरीना समेत परिजन खुदा बख्श गांव को रवाना हुए तो दुलहन मंतशा के घर में उनका इंतजार होने लगा था।
खानपान की तैयारी हो चुकी थी। उधर, ससुराल में भी दुलहन के स्वागत का इंतजाम किया गया था। मगर मंतशा के सास और जेठ समेत तीन लोगों की मौत ने हर किसी को सदमे में डाल दिया। घर के ठीक करीब हुए हादसे की जानकारी मिलते ही मंतशा भी बाहर निकली मगर उसे किसी तरह संभालकर अंदर ले जाया गया। वह रात तक रोती-कलपती रही। उसके मायके और ससुराल में मातम छा गया। खुशियों की जगह विलाप और सिसकियों ने ली।