कैंट पुलिस ने रविवार को खून का काला कारोबार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें बीटेक, पॉलीटेकिभनक व एमए का छात्र भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि इन्हें एएमए ब्लड बैंक के बाहर से गिरफ्तार किया गया। यह जरूरतमंद तीमारदारों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मनमाना पैसा वसूलते थे।
गिरफ्तारी करने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले सीओ सिविल लाइंस श्रीश्चंद्र ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एएमए सचिव डॉ. त्रिभुवन सिंह ने शनिवार को शिकायत की थी कि उंचवागढ़ी स्थित ब्लड बैंक के बाहर कुछ लोग खून की दलाली में लिप्त हैं। उनकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर कैंट पुलिस जांच में जुटी थी। रविवार दोपहर इंस्पेक्टर रमेश सिंह रावत, एसआई अमित दुबे, सुभाष यादव व कांस्टेबल अर्जुन, नासिर आदि ने सटीक सूचना पर ब्लड बैंक के नीचे स्थित ढाल से सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
पहले तो यह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते रहे। हालांकि सख्ती से पूछताछ में सच्चाई बता दी। बताया कि वह लंबे समय से खून की दलाली के काम में लगे थे। जरूरतमंदों को ब्लड बैंक के बाहर ही रोककर यह उनसे पूछताछ करते थे। वह खासतौर से उन लोेगों से मिलते थे, जिनके पास रक्तदाता नहीं होता था। इसके बाद उसे 10-15 हजार रुपये में एक यूनिट खून उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर रक्तदाता उपलब्ध कराते थे। रक्त देने वाले को एक-दो हजार रुपये देकर यह बाकी रकम हड़प कर जाते थे। गिरफ्तार आरोपियों में अभय पांडेय निवासी कुशीनगर, हाल पता उंचवागढ़ी कैंट, यासिर अंसारी निवासी कर्नलगंज, जैनिद खंडूरी निवासी पीएसी कॉलोनी नैनी, मो. सिद्दीकी निवासी मांडा, सुधाकर सिंह निवासी खीरी, गोपाल अवस्थी निवासी अलोपीबाग, दारागंज व राकेश सोनकर निवासी लाउदर रोड जार्जटाउन शामिल हैं।
सीओ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में जैनिद उत्तरांचल के एक कॉलेज से बीटेक कर रहा है। वह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष का छात्र है। इसके अलावा गिरोह का सरगना अभय पांडेय पॉलीटेक्निक, सुधाकर एमए व यासिर इंटर का छात्र है। सिद्दीकी मांडा में झोलाछाप क्लीनिक चलाता है। राकेश कृति स्कैनिंग के बगल में जूस की दुकान चलाता है जबकि, गोपाल मजदूरी करता है।
अभय पांडेय- पूरे गिरोह का सरगना, ऐसे जरूरतमंदों को चिह्नित करना जिनके पास डोनर न हो।
यासिर व जैनिद- डोनर की व्यवस्था करना और उसे सरगना तक पहुंचाना। इसके एवज में इन्हें दो हजार रुपये प्रति डोनर मिलते थे।
मो. सिद्दीकी- अभय से पांच हजार रुपये प्रति यूनिट खून खरीदकर 15-20 हजार रुपये में अस्पतालों को उपलब्ध कराना। सुधाकर, गोपाल व राकेश- अभय के कहने पर खून डोनेट करना और अपने जैसे अन्य लोगों को सरगना अभय से मिलवाना। इसके एवज में इन्हें दो-तीन हजार रुपये मिलते थे।
सीओ ने बताया कि पकड़ा गया मो. सिद्दीकी झोलाछाप है, जो मांडा स्थित समीरा अस्पताल में क्लीनिक चलाता है। इस संबंध में सीएमओ को रिपोर्ट भेजी जाएगी। साथ ही कार्रवाई का भी निवेदन किया जाएगा। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है कि वह किन-किन अस्पतालों में खून उपलब्ध कराता था।