अतीक अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले अशरफ की दूसरे के असलहों के साथ थाने पहुंचने पर फजीहत हो गई। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और असलहा चेक किए तो पता चला कि वह धूमनगंज निवासी उमेश पाल और उनकी पत्नी के नाम हैं। कुछ देर बाद लाइसेंस आए और उनके असलहा और लाइसेंस की गहनता से जांच करके उन्हें रिलीज कर दिया। गाड़ी में काली फिल्म होने के कारण चालान कर देर शाम वाहन और लाइसेंसी शस्त्र रिलीज किए ।
गुरुवार सुबह करीब 11 बजे हरवारा निवासी अशरफ कुछ मामलों की पैरवी के लिए सीओ सिविल लाइन कार्यालय पहुंचे थे। उसके साथ लाइसेंसी शस्त्र थे, किसी ने खबर दी कि उनके साथ शस्त्र तो हैं लेकिन लाइसेेंस धारक नहीं हैं। जिसे गंभीरता से लेते हुए थाने में उनके शस्त्रों की चेकिंग कराई गई। इस दौरान लाइसेंस मांगे तो पुलिस की अशरफ और उसके साथियों से झड़प हो गई। करीब आधा घंटे बाद लाइसेंस धारक सिविल लाइन थाने पहुंचे और लाइसेंस दिखाए। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने नसीहत दी कि लाइसेंसी असलहा अपने साथ रखें या फिर किसी की सुरक्षा में हैं तो वह उसके साथ रहे। किसी दूसरे व्यक्ति के हाथों में असलहा न दिया जाए।
हरवारा निवासी अशरफ किसी समय अतीक अहमद के साथ रहते थे। अतीक अहमद को फंसता देख उन्होंने अतीक गैेंग से किनारा कर लिया और राजू पाल की हत्या के गवाह उमेश पाल के साथ हो गए। इस दौरान अतीक अहमद के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज कराए और गवाह भी बने। ‘किसी भी व्यक्ति को हाथ में कानून नहीं लेने दिया जाएगा। जो भी व्यक्ति दूसरे के लाइसेंसी शस्त्र लेकर घूमेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’ आकाश कुलहरि, एसएसपी