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इलाहाबाद में दबोचा गया बिहार का इनामी बदमाश

Fri, 25 Mar 2016 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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पिछले 18 सालों से फरार चल रहे बिहार के 50 हजार के इनामी बदमाश सुनील सिंह उर्फ टिक्कर सिंह को एसटीएफ ने इलाहाबाद से दबोच लिया। इस अपराधी के यूपी में छिपा होने की सूचना पर बिहार पुलिस ने यूपी एसटीएफ से सहयोग की अपेक्षा की थी, जिस पर एसटीएफ ने यह कार्यवाही की।
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एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने इस अपराधी को तलाश कर गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविंद चतुर्वेदी के नेतृत्व वाली टीम को सौंपी थी। एसटीएफ की टीम को इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के जरिए सुनील सिंह के इलाहाबाद के आस-पास सक्रिय होने की जानकारी मिली। इस पर एसटीएफ सीओ प्रवीण सिंह चौहान ने एसआई अजय सिंह के नेतृत्व एक टीम गठित कर आरोपी के गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। एसटीएफ ने सोमवार रात सुनील सिंह को मुठ्ठीगंज इलाके से तब दबोच लिया। इलाहाबाद से बाहर भागने की फिराक में था।  
पूछताछ करने पर गिरफ्तार अभियुक्त टिक्कर सिंह उर्फ सुनील सिंह ने बताया कि वह मूलरूप से गांव बड़हिया जनपद लखीसराय बिहार का निवासी है। उसने कक्षा 12 तक गांव के ही स्कूल से शिक्षा ग्रहण की थी। बताया कि जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ता था तब उसके गांव के दबंग व आपराधिक प्रवृति के देबन सिंह, जिसके विरुद्ध लगभग 50 मुकदमे दर्ज थे, के नौकर ने उसके बड़े भाई नरेश सिंह को घोड़े से धक्का दे दिया था।
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इस पर उसके भाई ने देबन के नौकर की पिटाई कर दी थी।
इस पर देबन सिंह ने उसके व उसके भाई के खिलाफ  थाने में मारपीट का मुकदमा दर्ज करा दिया था तथा उसे स्कूल से वापस आते समय गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। उसके 22 दिन तक जेल में रहने के बाद रामदास सिंह जो पुलिस मे थे, ने उसकी जमानत करा दी थी। जेल से छूटने के बाद वह रामदास सिंह, जिसने पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी, के साथ रहने लगा। रामदास ने उसके जैसे करीब एक दर्जन नये लड़कों को असलहा चलाने की ट्रेनिंग दी थी तथा अपना  एक नया गैंग तैयार कर लिया था।
वर्ष 1980 में विधानसभा के चुनाव में बूथ लूटने का मुकदमा दर्ज होने पर 1981 मे हाजिर अदालत होकर वह जेल चला गया था। जेल से छूटने के पश्चात देबन सिंह बार बार उसके परिवार व उसको धमकाता था तथा उसने पुलिस से मिलकर रामदास को मुठभेड़ में मरवा दिया था।  इसके पश्चात दिनांक 16.01.1982 को उसने श्याम सिंह, भजन सिंह व मोहन सिंह ने मिलकर मुंगेर जेल से पेशी के दौरान कचहरी मे पुलिस अभिरक्षा मे कोर्ट ले जाते समय देबन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद रामदास के गैंग मे शामिल होकर उसका संचालन आठ वर्ष तक करता रहा। वर्ष 1989 में उसे पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था तथा कुछ माह बाद जेल से छूट गया था। जेल से छूटने के बाद वह गांव मे ही रह रहा था। वर्ष 1994 में उसकी शादी हो गयी थी। वर्ष 1997 में देबन सिंह के भाई वशिष्ठ सिंह ने भाड़े के शूटर जोगी सिंह से उसके भाई नरेश सिंह की हत्या करा दी थी। इसके पश्चात वह बिहार छोड़कर वाराणसी में अपने परिवार के साथ मकान खरीदकर रहने लगा तथा इसी दौरान उसपर दस मुकदमे पंजीकृत हुए थे, जिनमें चार मुकदमे हत्या के थे लेकिन इसी दौरान उसको जानकारी हुई कि सूरजभान सिंह व अरुण सिंह उसकी हत्या की साजिश रच रहे हैं, तब वह वाराणसी से मकान बेचकर वर्ष 2004 से इलाहाबाद मे नाम बदलकर रह रहा था।
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