टीम में शामिल कांस्टेबल जीतेंद्र ने बताया कि भोर में 3.23 मिनट पर जैसे ही टीम प्रयागराज जंक्शन से रवाना हुई, तभी दिलशाद ने टॉयलेट जाने की बात कही। दोनों के हाथ में हथकड़ी थी, ऐसे में वह दोनों को लेकर जाने लगा। गेट के पास पहुंचते ही दोनों ने उसे मुक्का मारकर जमीन पर गिरा दिया और फिर भाग निकले। उसने अपने साथियों व दूसरे कोच में बैठे दोनों एसआई को जानकारी दी तो सभी उनकी तलाश में जुट गए। उन्होंने चेन पुलिंग कर ट्रेन रोकनी चाही लेकिन आरपीएफ स्टाफ ने रोक दिया और कहा कि अगले स्टेशन पर उतरक र पुलिस को सूचना दी जाए।
कानपुर पहुंचने पर उन्होंने ट्रेन से उतरकर आरपीएफ पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी फुटेज देखी, लेकिन बदमाशों का सुराग नहीं मिला। आरपीएफ अफसरों के कहने पर वह जीआरपी थाने गए तो प्रयागराज जीआरपी में शिकायत दर्ज कराने को कहा गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम शाम 3.30 बजे के करीब वापस जंक्शन पर आई और तहरीर दी। जीआरपी इंस्पेक्टर राजीवरंजन उपाध्याय ने बताया कि दोनों मुल्जिमों पर नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। उनकी तलाश की जा रही है।
लाखों की चोरी के केस में थे वांछित
दिल्ली पुलिस की ओर से जीआरपी को बताया गया कि फरार होने वाले दोनों मुल्जिम दिल्ली में इसी साल हुई लाखों की चोरी के मामले में वांछित थे। यह घटना साउथ दिल्ली के ग्रेटर कैलाश थाना क्षेत्र में हुई थी। दोनों के बिहार में होने की सूचना मिलने पर 12 जुलाई को ग्रेटर कैलाश थाने की पांच सदस्यीय टीम ने बिहार पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार किया। इस टीम में एसआई जीतेंद्र, एसआई वरुण, एएसआई मैजर हुसैन, कांस्टेबल अंकुर व हेड कांस्टेबल जीतेंद्र शामिल थे। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश किया और फिर ट्रांजिट रिमांड की अर्जी दी। अर्जी मंजूर होने पर वह उन्हें लेकर दिल्ली जा रहे थे तभी यह घटना हुई।