कोरोना के खौफ के कारण इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कॉमर्स के विभागाध्यक्ष प्रो. एके सिंघल ने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह मोनिरबा के निदेशक पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे है। प्रो. सिंघल का कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है, जबकि चर्चा यह भी है कि कुछ लोग उन पर पीएचडी में प्रवेश के लिए दबाव बना रहे थे, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दिया।
प्रो. एके सिंघल का कहना है कि वह अस्थमा के मरीज हैं और आयु भी 60 साल से अधिक हो गई है। विभागाध्यक्ष होने के नाते रोज कार्यालय में मास्क पहनकर बैठना पड़ता है। सांस लेने में दिक्कत होती है। तमाम लोग मिलने के लिए आते रहते हैं। अधिक आयु होने के कारण कोरोना संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है।
ऐसे में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया है। विभागाध्यक्ष के पास ही मोनिरबा के निदेशक पद की जिम्मेदारी भी होती है, सो इस पद से भी उनका इस्तीफा माना जाएगा। प्रो. सिंघल का कहना है कि पीएचडी प्रवेश को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया।
वहीं, इविवि में चर्चा है कि वाणिज्य विभाग में पीएचडी की 55 सीटों पर प्रवेश के लिए संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा कराई गई थी, जिसमें सत्र 2019-20 के लिए 48 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था और एससी-एसटी कोटे की सात सीटें खाली रह गईं थी। 48 सीटों पर चयन कुलपति ने निरस्त कर दिया था जबकि ये प्रवेश प्रो. सिंघल की निगरानी में हुए थे।
बाद में चयनित अभ्यर्थी इस मामले में हाईकोर्ट गए और वहां से राहत मिलने के बाद सभी को प्रवेश दे दिया गया। अब रिक्त रह गईं सात सीटों पर प्रवेश के लिए प्रो. सिंघल पर दबाव बनाया जा रहा है और वह इसके लिए तैयार नहीं हैं।