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Covid-19 News: निजी अस्पतालों में उपचार कराने जा रहे रहो लोग हो रहे कोरोना संक्रमित

Sun, 19 Jul 2020 01:33 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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निजी अस्पतालों में उपचार कराने पहुंच रहे लोग कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक निजी अस्पतालों से रोजाना कोरोना के आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। कुछ अस्पतालों में हर दूसरे-तीसरे दिन मरीज पॉजिटिव आ रहे हैं। इनमें कुछ प्रसव कराने वाली महिलाएं हैं, जबकि कुछ ऐसे लोग हैं जो सर्जरी के लिए गए और पॉजिटिव आ गए। कोरोना से जान गंवाने वाला दारागंज का व्यक्ति तो अस्पताल में ही संक्रमित हुआ। 

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हस्तरेखा चिकित्सक
जानकारों का कहना है कि उपचार के लिए जाएं तो अपने आप को संभालकर रखने की जरूरत है। कब और कैसे संक्रमित हो जाएं इसका पता नहीं चलेगा और वायरस अपनी आगोश में ले लेगा। डॉक्टर भी कह रहे हैं कि कोरोना के ए सिम्टोमेटिक मरीज घूम रहे हैं। वे अपनी जांच भी नहीं करा रहे हैं और अनजाने में ही वे दूसरे लोगों को संक्रमित कर रहे हैं। ऐसे में संक्रमण बढ़ रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के पास इन मामलों से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है। 

दारागंज का व्यक्ति बाईकाबाग स्थित अस्पताल में फोड़े का ऑपरेशन कराने गया था। अस्पताल ने भर्ती करने से पहले उससे कोरोना संक्रमित न होने की रिपोर्ट मांगी। उसने मेडिकल कॉलेज में जांच कराई और रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद व्यक्ति बाईकाबाग स्थित निजी चिकित्सालय में भर्ती हुआ। वहां उसके फोड़े का ऑपरेशन हुआ। मरीज वहां करीब 12 दिन तक भर्ती रहा।

डाक्टर - फोटो : file photo
इसी दौरान वह कोरेाना संक्रमित हो गया। प्राइवेट लैब की जांच में वह पॉजिटिव आ गया। वह एसआरएन में शिफ्ट किया गया लेकिन यहां उसकी मौत हो गई। इसी तरह करेली का आठ माह का बच्चा भी टैगोर टाउन स्थित अस्पताल में पॉजिटिव पाया गया था। बच्चे की फेमिली का और कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। निजी अस्पतालों में पॉजिटिव मामले रोजाना आ रहे हैं। सभी निजी लैब में जांच करा रहे हैं। 

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एसआरएन चिकित्सालय के कोरोना के नोडल इंचार्ज डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि अगर मरीज हफ्ते या 10 दिनों तक भर्ती है और पॉजिटिव आता हैं तो अधिक संभावना यही है कि व्यक्ति निजी अस्पताल में ही संक्रमित हुआ है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों से आने वाले पॉजिटिव मरीजों का विवरण नहीं दिया जा रहा है। जैसे-मरीज कब भर्ती हुआ, कोरोना के अलावा उसकी कौन-कौन सी जांच कराई गई।

किस हालत में पहुंचा, क्या मरीज पहले से पॉजिटिव था आदि जानकारियां मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। ऐसे में वह संक्रमित कहां हुआ यह बताना मुश्किल है। उधर, कोरोना के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषि सहाय ने बताया कि ओपीडी खुलने के बाद से लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं और अपनी जांच भी करा रहे हैं। इसलिए निजी अस्पतालों से अब पॉजिटिव मामले ज्यादा आ रहे हैं। 
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कई अस्पतालों में मरीजों को देखने वालेे डॉक्टर्स से भी फैल सकता है कोरोना

महामारी के दौर में डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मी हमारे कोरोना वैरियर्स हैं लेकिन कई ऐसे भी डॉक्टर्स हो सकते हैं जो ए सिम्प्टोमैटिक हो और अल्ट्रासाउंड कराने वाले लोग संपर्क में आकर पॉजिटिव हो रहे हैं। कोरोना के नोडल अधिकारी डॉ0 ऋषि सहाय कहते हैं कि उन्होंने तीन रेडियोलॉजिस्ट को कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद क्वारंटीन कराया था।

इसमें जार्जटाउन के एक नामचिन रेडियोलॉजिस्टि भी शामिल हैं। जबकि शहर में आधा दर्जन से अधिक सरकारी अस्पातलों में तैनात रेडियोलॉजिस्टि हैं जो शहर के कई बड़े निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड की जांच करने जा रहे हैं। उनसे भी कोरोना के संक्रमण फैलने की संभावना है। डॉ0 ऋषि सहाय इससे इंकार नहीं करते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थिति में किसी से भी कोरोना फैल सकता है।
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