जानकारों का कहना है कि उपचार के लिए जाएं तो अपने आप को संभालकर रखने की जरूरत है। कब और कैसे संक्रमित हो जाएं इसका पता नहीं चलेगा और वायरस अपनी आगोश में ले लेगा। डॉक्टर भी कह रहे हैं कि कोरोना के ए सिम्टोमेटिक मरीज घूम रहे हैं। वे अपनी जांच भी नहीं करा रहे हैं और अनजाने में ही वे दूसरे लोगों को संक्रमित कर रहे हैं। ऐसे में संक्रमण बढ़ रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के पास इन मामलों से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है।
दारागंज का व्यक्ति बाईकाबाग स्थित अस्पताल में फोड़े का ऑपरेशन कराने गया था। अस्पताल ने भर्ती करने से पहले उससे कोरोना संक्रमित न होने की रिपोर्ट मांगी। उसने मेडिकल कॉलेज में जांच कराई और रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद व्यक्ति बाईकाबाग स्थित निजी चिकित्सालय में भर्ती हुआ। वहां उसके फोड़े का ऑपरेशन हुआ। मरीज वहां करीब 12 दिन तक भर्ती रहा।
इसी दौरान वह कोरेाना संक्रमित हो गया। प्राइवेट लैब की जांच में वह पॉजिटिव आ गया। वह एसआरएन में शिफ्ट किया गया लेकिन यहां उसकी मौत हो गई। इसी तरह करेली का आठ माह का बच्चा भी टैगोर टाउन स्थित अस्पताल में पॉजिटिव पाया गया था। बच्चे की फेमिली का और कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। निजी अस्पतालों में पॉजिटिव मामले रोजाना आ रहे हैं। सभी निजी लैब में जांच करा रहे हैं।
एसआरएन चिकित्सालय के कोरोना के नोडल इंचार्ज डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि अगर मरीज हफ्ते या 10 दिनों तक भर्ती है और पॉजिटिव आता हैं तो अधिक संभावना यही है कि व्यक्ति निजी अस्पताल में ही संक्रमित हुआ है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों से आने वाले पॉजिटिव मरीजों का विवरण नहीं दिया जा रहा है। जैसे-मरीज कब भर्ती हुआ, कोरोना के अलावा उसकी कौन-कौन सी जांच कराई गई।
किस हालत में पहुंचा, क्या मरीज पहले से पॉजिटिव था आदि जानकारियां मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। ऐसे में वह संक्रमित कहां हुआ यह बताना मुश्किल है। उधर, कोरोना के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषि सहाय ने बताया कि ओपीडी खुलने के बाद से लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं और अपनी जांच भी करा रहे हैं। इसलिए निजी अस्पतालों से अब पॉजिटिव मामले ज्यादा आ रहे हैं।