इसका सीसीटीवी व वीडियो फुटेज भी साक्ष्य के रूप में मौजूद है। फिर आखिर अब तक कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया। इस मामले में डीसीपी नगर अभिषेक भारती का कहना है कि दरोगा की प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं। एसएसएफ के अफसरों ने घटना में शामिल सिपाही की भी प्रारंभिक जांच शुरू करा दी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
मारपीट में शामिल प्राइवेट लोगों की पहचान क्यों नहीं की?
इस प्रकरण में एक सवाल यह भी है कि दरोगा के साथ मिलकर जिन प्राइवेट लोगों ने एसएसएफ के सिपाही की पिटाई की, धूमनगंज पुलिस ने उनकी पहचान के लिए अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया। जबकि, गेस्ट हाउस में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से उन्हें पहचाना जा सकता है। सवाल यह भी है कि मामला दरोगा का था तो उन्होंने खुद को फोर्स का बताने के बावजूद सिपाही पर कैसे और क्यों हमला किया?